Bengal Cabinet Decisions: पश्चिम बंगाल की सत्ता में हुए बड़े उलटफेर के बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कार्यभार संभालते ही राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को नई दिशा देनी शुरू कर दी है।
हावड़ा के ‘नबन्ना’ (सचिवालय) में हुई नई भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह उन नीतियों पर कड़ा प्रहार था जो पिछले कई सालों से विवाद का केंद्र बनी हुई थीं।
सीएम सुवेंदु ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार ‘सिद्धांतों’ पर चलेगी, ‘अहंकार’ पर नहीं।

1. राष्ट्रीय सुरक्षा: बॉर्डर फेंसिंग के लिए BSF को जमीन
कैबिनेट बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा से जुड़ा है।
पश्चिम बंगाल की 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है, जो देश की सबसे लंबी स्टेट बॉर्डर है।
सीएम सुवेंदु ने कहा कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने के लिए सीमा पर बाड़ (Fencing) लगाने के काम में रोड़े अटकाए थे।

अब नई सरकार ने फैसला किया है कि बॉर्डर फेंसिंग के लिए जरूरी जमीन गृह मंत्रालय और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इसके लिए 45 दिन की समय सीमा तय की है।
उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित 127 किलोमीटर के पैच में से पिछली सरकार ने केवल 8 किलोमीटर पर काम होने दिया था।
अब घुसपैठ रोकने के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ जमीन का हस्तांतरण होगा।

2. 11 महीने बाद शुरू होगी जनगणना (Census)
राज्य में जनगणना की प्रक्रिया पिछले करीब एक साल से रुकी हुई थी।
सुवेंदु अधिकारी ने इसे लेकर कड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने जानबूझकर जनगणना रोकी थी ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) और महिलाओं के लिए आरक्षण की राह में बाधा डाली जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा, “16 जून, 2025 को जारी हुई अधिसूचना के बावजूद प्रक्रिया को लटकाया गया। हम इसकी जांच के लिए एक ‘तथ्य-खोज समिति’ (Fact-finding Committee) बनाएंगे।”
अब बंगाल में जनगणना का काम तत्काल प्रभाव से शुरू होगा।
3. नए आपराधिक कानून (BNS) की एंट्री
केंद्र सरकार ने देशभर में पुराने IPC और CrPC को बदलकर नए आपराधिक कानून ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) लागू किए थे, लेकिन बंगाल में इसे लेकर गतिरोध बना हुआ था।
सुवेंदु कैबिनेट ने अब राज्य में BNS को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे न्याय प्रणाली आधुनिक होगी और अपराधियों पर नकेल कसना आसान होगा।
4. आयुष्मान भारत: स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘डबल इंजन’ का लाभ
बंगाल के लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर ‘आयुष्मान भारत-जन आरोग्य योजना’ का लागू होना है।
पूर्ववर्ती सरकार अपनी ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना के कारण केंद्र की इस योजना को राज्य में आने से रोक रही थी।
अब सुवेंदु सरकार ने इस पर मुहर लगा दी है।

स्वास्थ्य विभाग और केंद्र के बीच समझौतों की प्रक्रिया आज से ही शुरू हो गई है।
इसके अलावा, उज्ज्वला योजना से जुड़ी लंबित याचिकाओं को भी केंद्र के पास भेज दिया गया है ताकि गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिल सकें।
5. चुनावी हिंसा के पीड़ितों को न्याय
बंगाल की राजनीति में हिंसा एक काला अध्याय रही है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि चुनावी हिंसा के दौरान मारे गए 321 भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों की जिम्मेदारी अब राज्य सरकार उठाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि पीड़ित परिवार कानूनी कार्रवाई चाहते हैं, तो सरकार उन पुराने केसों की दोबारा जांच कराने के लिए तैयार है।
यह कदम सीधे तौर पर उन लोगों को संदेश है जो राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति में शामिल थे।
6. प्रशासनिक सुधार और कर्मचारियों को तोहफा
सरकारी कर्मचारियों के लिए भी कैबिनेट ने बड़े फैसले लिए हैं:
नौकरियों में विस्तार: राज्य सरकार की नौकरियों में 5 साल का विस्तार (Extension) दिया गया है।
IAS-IPS ट्रेनिंग: अब बंगाल के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को केंद्र सरकार की ट्रेनिंग में जाने की अनुमति दी जाएगी, जिसे पहले राज्य सरकार ने काफी हद तक सीमित कर दिया था।
पारदर्शिता: सीएम ने साफ किया कि ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कोई भी जनहितकारी योजना बंद नहीं होगी, लेकिन उनकी समीक्षा होगी। अपात्र लोगों, अवैध घुसपैठियों या मृत व्यक्तियों के नाम लिस्ट से हटाए जाएंगे ताकि असली हकदारों को लाभ मिले।

7. तुष्टीकरण के खिलाफ सख्त रुख
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की पहचान भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बन गई थी।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के मंत्र ‘भय आउट, भरोसा इन’ (Bhoy Out, Bharosa In) को दोहराते हुए कहा कि अब राज्य में किसी को डरने की जरूरत नहीं है, सरकार सबके विकास के लिए काम करेगी।

सुवेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पश्चिम बंगाल अब केंद्र के साथ टकराव की नहीं, बल्कि समन्वय की राह पर चलेगा।
बॉर्डर सुरक्षा, जनगणना और राष्ट्रीय कानूनों को प्राथमिकता देकर उन्होंने अपनी ‘नेशन फर्स्ट’ की नीति को उजागर कर दिया है।
आने वाले दिनों में विभागों का बंटवारा होने के बाद इन फैसलों के क्रियान्वयन में और तेजी आने की उम्मीद है।
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