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ममता के करीबियों ने छोड़ा साथ: Bjp की प्रचंड जीत के बाद सलाहकारों का इस्तीफा, सुवेंदु के PA की हत्या से सनसनी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bengal Political Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो गई है, लेकिन यह बदलाव शांतिपूर्ण होने के बजाय उथल-पुथल और सनसनीखेज वारदातों से भरा नजर आ रहा है।

हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया है।

जहाँ एक तरफ ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों ने सामूहिक रूप से अपने पद छोड़ दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) की निर्मम हत्या ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

1. ममता के किले में भगदड़: करीबियों ने फेरा मुंह

चुनाव परिणामों के आते ही ममता बनर्जी का प्रशासनिक और राजनीतिक ‘इकोसिस्टम’ ताश के पत्तों की तरह बिखर गया है।

बीजेपी की ‘भगवा सुनामी’ ने न केवल टीएमसी को सत्ता से बाहर किया, बल्कि ममता बनर्जी को उनकी अपनी सीट भवानीपुर से भी हार का सामना करना पड़ा।

 अलापन बंद्योपाध्याय का इस्तीफा:

ममता बनर्जी के सबसे वफादार और पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय ने चुनाव नतीजे आने के अगले ही दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

यह वही अधिकारी हैं जिनके लिए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार तक से मोर्चा ले लिया था।

उन्हें ममता की ‘आंख और कान’ कहा जाता था।

अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार 

बंगाल की आर्थिक नीतियों के जनक माने जाने वाले अभिरूप सरकार ने भी इस्तीफा सौंप दिया है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी नियुक्ति राजनीतिक थी और अब जबकि मुख्यमंत्री हार गई हैं, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

कानूनी सलाहकारों का किनारा:

राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

किशोर दत्ता ही वह शख्स थे जो शिक्षक भर्ती घोटाला और चुनावी हिंसा जैसे गंभीर मामलों में सरकार का बचाव कर रहे थे।

2. सुवेंदु अधिकारी के PA की हत्या: बांग्लादेश कनेक्शन

राजनीतिक उथल-पुथल के बीच उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर आई।

बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई।

वारदात का तरीका:

चंद्रनाथ रथ अपनी कार में घर लौट रहे थे। वे ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे थे, तभी हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाकर फायरिंग की।

3 हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार:

बंगाल पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 3 कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

पूछताछ में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इन हत्यारों का लिंक बांग्लादेश बॉर्डर से जुड़ा है।

सुपारी किलिंग का शक:

पुलिस को अंदेशा है कि यह एक सोची-समझी ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ है।

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर भागने की फिराक में थे, ताकि वे पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण ले सकें।

3. सियासी आरोप-प्रत्यारोप और उबाल

इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड ने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है।

बीजेपी ने सीधा आरोप लगाया है कि यह टीएमसी के ‘गुंडों’ का काम है और वे हार का बदला खून से ले रहे हैं।

बीजेपी कार्यकर्ता अब दोषियों के एनकाउंटर की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।

दूसरी ओर, सत्ता गंवा चुकी टीएमसी ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि वे खुद चाहते हैं कि सच सामने आए, इसलिए उन्होंने इस मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।

4. बीजेपी का प्रचंड बहुमत और बंगाल का भविष्य

294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है।

इस जीत ने ममता बनर्जी के अजेय होने के मिथक को तोड़ दिया है।

हालांकि, ममता बनर्जी ने अभी भी हार स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग और बीजेपी पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है।

पश्चिम बंगाल फिलहाल एक दोराहे पर खड़ा है।

एक तरफ नई सरकार के गठन की तैयारी है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का सामूहिक पलायन और राजनीतिक हत्याओं का दौर जारी है।

सुवेंदु अधिकारी के PA की हत्या में बांग्लादेशी लिंक का मिलना मामले को और अधिक संवेदनशील बनाता है, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी बन सकता है।

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