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बर्फ से ढके रेत के टीले: सऊदी अरब में 30 साल बाद हुई बर्फबारी, आखिर क्या है इसकी वजह?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Saudi Arabia snowfall: सऊदी अरब का नाम सुनते ही जेहन में रेत के टीलों, चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी की तस्वीर उभरती है।

लेकिन हाल ही में, यह रेगिस्तानी देश एक हैरतअंगेज और दुर्लभ नज़ारे से सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

देश के उत्तरी इलाक़ों के रेगिस्तानी पहाड़ों पर बर्फ़ की सफ़ेद चादर बिछ गई है।

यह घटना लगभग 30 साल बाद घटी है और मौसम वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक सभी के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।

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बर्फ से ढके रेत के टीले: कुदरत का अनोखा करिश्मा

सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिमी इलाक़े तबुक में स्थित ‘जबल अल-लॉज’ (बादाम का पहाड़) और आस-पास के ट्रोजेना हाईलैंड्स इन दिनों बर्फ की सफेदी से नहाए हुए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियोज़ में दूर-दूर तक फैले रेगिस्तान में सफेद पहाड़ नजर आ रहे हैं, जो देखने वालों को अविश्वसनीय लग रहा है।

कई लोग तो इसे एआई से बनी तस्वीर समझ रहे हैं, लेकिन यह एकदम वास्तविक है।

इस दुर्लभ मौसमी घटना ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों में उत्साह का संचार किया है।

बर्फ देखने के लिए अल-मजमाह और अल-घाट जैसे इलाकों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।

हालांकि, ख़राब मौसम और ठंड को देखते हुए अधिकारियों ने स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा का सहारा लिया है और लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी भी जारी की है।

आखिर क्या है इस अचानक बर्फबारी की वजह?

इस असामान्य मौसमी घटना के पीछे कई कारण और तर्क दिए जा रहे हैं:

  1. जलवायु परिवर्तन का प्रमुख योगदान: मौसम वैज्ञानिकों का मुख्य मत है कि यह जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का सीधा प्रभाव है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पूरी दुनिया के मौसम चक्र में अप्रत्याशित बदलाव आ रहे हैं। जिन क्षेत्रों को अत्यधिक गर्म और शुष्क माना जाता था, वहां अब अचानक भारी बारिश, ओलावृष्टि या बर्फबारी जैसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं। ध्रुवों पर बर्फ पिघलने से समुद्री और वायुमंडलीय धाराओं के पैटर्न बदल रहे हैं, जिसका असर मध्य पूर्व जैसे इलाकों पर भी पड़ रहा है।

  2. मौसमी चक्रों में उतार-चढ़ाव: कुछ विशेषज्ञ इसे एक अस्थायी मौसमी उतार-चढ़ाव भी मान रहे हैं, जहां ठंडी हवा के थपेड़े (कोल्ड स्नैप) सऊदी अरब के उत्तरी पहाड़ी इलाकों तक पहुंच गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप बारिश के बजाय तापमान शून्य से नीचे जाने पर बर्फबारी हुई है।

  3. सामाजिक व धार्मिक मान्यताएं: सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे धार्मिक दृष्टि से भी देख रहे हैं और कुछ भविष्यवाणियों से जोड़ रहे हैं। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण इस पर जलवायु परिवर्तन को ही प्रमुख कारण मानता है।

केवल सऊदी ही नहीं, पूरे खाड़ी क्षेत्र का मौसम बदला

दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब में बर्फबारी की यह घटना अकेली नहीं है।

इसी हफ्ते, पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भी भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं सामने आईं।

दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में इतनी तेज बारिश हुई कि सड़कें नदी बन गईं, यातायात ठप हो गया और कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

अधिकारियों ने लोगों को घरों में ही रहने की सलाह दी।

यूएई जैसे देश, जहां का इंफ्रास्ट्रक्चर शुष्क मौसम के हिसाब से बना है, वहां अचानक आने वाली ऐसी भारी वर्षा बाढ़ की स्थिति पैदा कर देती है।

नालियां और जल निकासी तंत्र इतने अधिक पानी को संभाल नहीं पाते।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ते तापमान के कारण समुद्र से अधिक मात्रा में पानी वाष्पित होकर वायुमंडल में जा रहा है, जो अचानक भारी बारिश के रूप में बरस रहा है।

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भविष्य के लिए क्या हैं संकेत?

सऊदी अरब में बर्फबारी और यूएई में बाढ़ जैसी घटनाएं एक गंभीर चेतावनी हैं।

ये दर्शाती हैं कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ ध्रुवों पर बर्फ पिघलने या समुद्र का स्तर बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर दुनिया के हर कोने में दिखने लगा है।

मौसम का मिजाज बदल रहा है और ‘असामान्य’ घटनाएं अब ‘सामान्य’ होती जा रही हैं।

सऊदी के रेगिस्तान में बर्फ का यह नज़ारा भले ही आंखों को सुकून देने वाला और पर्यटन को बढ़ावा देने वाला लगे, लेकिन यह प्रकृति का वह संदेश है जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।

यह स्पष्ट संकेत है कि धरती का तापमान बढ़ रहा है और इसके परिणाम कहीं भी, कभी भी दिख सकते हैं।

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