MP Interstate Bus Service 2026: मध्य प्रदेश के निवासियों और यात्रियों के लिए परिवहन विभाग की तरफ से एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आई है।
राज्य सरकार ने करीब 15 साल के लंबे समय के बाद इंटरस्टेट (अंतरराज्यीय) बस सेवाओं को पुनः बहाल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।
वर्ष 2010 में बंद कर दिए गए 389 पुराने रूटों को फिर से शुरू किया जा रहा है।
इसका सीधा फायदा उन लाखों यात्रियों को होगा जो काम, शिक्षा या पर्यटन के सिलसिले में राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्यों का सफर करते हैं।
निजी ऑपरेटरों की मनमानी का होगा अंत
पिछले कई वर्षों से सरकारी बसों की अनुपस्थिति में निजी बस ऑपरेटरों का एकाधिकार (Monopoly) बन गया था।
त्यौहारों और छुट्टियों के दौरान यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जाता था।
लेकिन अब सरकार के इस फैसले से यात्रियों को ‘सरकारी संधि’ वाली बसों का विकल्प मिलेगा।
इसका मतलब है कि बसें भले ही निजी ऑपरेटरों के सहयोग से चलें, लेकिन उनका किराया, समय और रूट सरकार की निगरानी में होगा, जिससे आम आदमी को सुरक्षित और किफायती सफर की गारंटी मिलेगी।
कैसा होगा संचालन का मॉडल?
आपके मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या सरकार नई बसें खरीदने जा रही है?
फिलहाल जो योजना बनी है, उसके तहत ‘मध्य प्रदेश राज्य परिवहन उपक्रम’ सीधे तौर पर नई बसें खरीदने के बजाय पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल जैसा रास्ता अपनाएगा।
सरकार निजी बस मालिकों (Private Operators) के साथ एग्रीमेंट साइन करेगी।
इन मालिकों को उन पुराने 389 रूटों पर बस चलाने के लिए विशेष परमिट जारी किए जाएंगे।
यह व्यवस्था पुराने समय के ‘मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम’ (MPRTC) के रूटों को पुनर्जीवित करने के लिए की गई है।
किस राज्य के लिए कितनी बसें? (रूट चार्ट)
परिवहन मंत्री राव उदयप्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में रूटों का बंटवारा भी तय कर लिया गया है।
इसमें सबसे ज्यादा फोकस पड़ोसी राज्य राजस्थान पर है।
| राज्य (State) | रूटों की संख्या (Routes) |
| राजस्थान | 200 |
| महाराष्ट्र | 81 |
| उत्तर प्रदेश | 69 |
| गुजरात | 30 |
| उत्तराखंड | 09 |
| हरियाणा | 03 |
खास बात यह है कि अब मध्य प्रदेश से देवभूमि उत्तराखंड और हरियाणा के लिए भी सीधी बस सेवा उपलब्ध होगी, जिससे तीर्थयात्रियों और वहां नौकरी करने वाले लोगों को बार-बार बस बदलने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।
गुजरात सरकार के साथ 30 रूटों पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही अन्य राज्यों के साथ भी अंतिम मुहर लग जाएगी।
बाहरी ट्रकों पर कसेगा शिकंजा, बढ़ेगा राजस्व
सिर्फ यात्रियों की सुविाधा ही नहीं, बल्कि सरकार ने राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए एक और कड़ा फैसला लिया है।
मध्य प्रदेश की सड़कों पर दौड़ने वाले ऐसे हजारों ट्रक, जो काम तो एमपी में करते हैं लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) दूसरे राज्यों का है, अब रडार पर होंगे।
सरकार ने साफ कर दिया है कि बाहरी राज्यों के पासिंग वाले इन ट्रकों का मध्य प्रदेश में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
इससे सरकार को मोटर व्हीकल टैक्स (Motor Vehicle Tax) के रूप में करोड़ों रुपये की कमाई होगी, जो अब तक दूसरे राज्यों को मिल रही थी।
कब से शुरू होगी सेवा?
इस पूरी कवायद को अमली जामा पहनाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, परिवहन विभाग ने परमिट जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दे दिया है।
जैसे ही स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का गठन पूरा होगा, अटके हुए आवेदनों का निपटारा कर बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, यह फैसला मध्य प्रदेश के परिवहन क्षेत्र में एक नई जान फूंकने वाला है।
इससे न केवल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
15 साल बाद पुराने रूटों की बहाली यह दर्शाती है कि सरकार अब सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए गंभीर है।


