US Russian Oil Relief: कच्चे तेल की कीमतें देखते ही देखते 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।
आलम यह है कि ईरान ने चेतावनी दे दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो यह आंकड़ा 200 डॉलर भी छू सकता है।
ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अमेरिका को अपने सख्त रुख में नरमी लानी पड़ी है।
ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रूसी तेल की खरीद पर लगी पाबंदी में 30 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है।
The US Treasury Department announced Thursday it was taking steps to further ease sanctions on Russian oil as crude prices surge during the Iran war. The agency said that it was granting a license that authorises the delivery and sale of some sanctioned Russia crude oil and… pic.twitter.com/98hARIYuS7
— Press Trust of India (@PTI_News) March 13, 2026
क्या है अमेरिकी ट्रेजरी का नया आदेश?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय (Treasury Department) ने गुरुवार को एक विशेष लाइसेंस जारी किया।
इसके तहत उन रूसी तेल टैंकरों को अपना माल बेचने और डिलीवरी करने की इजाजत दी गई है, जो 12 मार्च की आधी रात से पहले ही समुद्र में निकल चुके थे।
आसान भाषा में कहें तो, जो तेल रास्ते में फंसा हुआ था, उसे अब बाजार में आने दिया जाएगा।
यह छूट 11 अप्रैल तक लागू रहेगी।

अमेरिका ने क्यों बदला मन?
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होर्मुज (Strait of Hormuz) का संकट: ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव की वजह से दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ लगभग ठप है। दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां से सप्लाई रुकी रही, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो जाएगी। रूस का तेल इस कमी को पूरा करने का एक जरिया बना है।
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कीमतों को $200 होने से रोकना: मिडिल ईस्ट में तेल के कुओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें अचानक 9% बढ़ गईं। अमेरिका को डर है कि अगर कच्चा तेल $150-$200 के पार गया, तो पूरी दुनिया में मंदी आ जाएगी। रूसी तेल को बाजार में उतारकर सप्लाई बढ़ाई जा रही है ताकि कीमतें नीचे आ सकें।
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फंसे हुए सप्लाई चेन को खोलना: रूस के कई तेल टैंकर फिलहाल समुद्र के बीचों-बीच खड़े हैं। अमेरिकी पाबंदियों के डर से कोई उन्हें खरीद नहीं रहा था। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि यह एक शॉर्ट-टर्म फैसला है ताकि बाजार में स्थिरता आए। उनका दावा है कि इससे रूस को ज्यादा फायदा नहीं होगा क्योंकि यह तेल पहले ही निकाला जा चुका है।

भारत का स्टैंड क्या है?
भारत शुरू से ही कहता रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए किसी भी देश से तेल खरीदने को स्वतंत्र है।
भारतीय अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि उन्हें रूसी तेल खरीदने के लिए किसी की ‘परमिशन’ की जरूरत नहीं है।
हालांकि, अमेरिका की इस आधिकारिक छूट से भारतीय रिफाइनरियों के लिए पेमेंट और इंश्योरेंस की बाधाएं कम हो जाएंगी, जिससे भारत को सस्ता तेल मिलना आसान होगा।
🇺🇸🇷🇺 Oil prices have started to gradually decline – after the US issued a temporary license to purchase Russian oil.
According to specialized resources, after this, Brent fell by 0.38% to $100.10 per barrel, and WTI by 0.58% to $95.17.
At the same time, US Treasury Secretary… pic.twitter.com/ygTGevMeby
— The Daily News (@DailyNewsJustIn) March 13, 2026
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