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RG KAR केस: पूर्व TMC MLA पर भीड़ का हमला, कोर्ट ले जाते वक्त फेंके जूते-अंडे; पीड़िता का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने का आरोप

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

RG Kar Case cremation controversy: कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की ट्रेनी डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है।

मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक निर्मल घोष और उनके सहयोगी संजीब मुखर्जी को जनता के भारी गुस्से का सामना करना पड़ा है।

शुक्रवार को जब पुलिस दोनों आरोपियों को उत्तर 24 परगना जिले के खरदह थाने से बैरकपुर अदालत में पेशी के लिए ले जा रही थी, तब गुस्साई भीड़ ने उन्हें घेर लिया।

थाने के बाहर हंगामा, भीड़ ने की मारपीट

अदालत ले जाते समय स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई जब वहां मौजूद लोगों ने पूर्व विधायक निर्मल घोष और संजीब मुखर्जी पर हमला कर दिया।

आक्रोशित भीड़ ने आरोपियों पर लात-घूंसे चलाए और जमकर जूते-चप्पल, अंडे तथा कीचड़ फेंके।

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने आरोपियों के सिर पर हेलमेट लगा रखा था, लेकिन इसके बावजूद निर्मल घोष के कपड़ों पर अंडे और कीचड़ के साफ निशान देखे गए।

जब पुलिस गाड़ियों का काफिला बैरकपुर कोर्ट परिसर में पहुंचा, तो वहां मौजूद आम जनता और वकीलों ने ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए।

भारी मशक्कत और कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिसकर्मियों ने दोनों आरोपियों को सुरक्षित कोर्ट के लॉकअप तक पहुंचाया।

क्या हैं गंभीर आरोप?

9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में एक ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में पूर्व विधायक निर्मल घोष, पानीहाटी नगरपालिका के पूर्व पार्षद संजीब मुखर्जी और पूर्व चेयरमैन सोमनाथ डे पर बेहद संगीन आरोप लगे हैं।

आरोप है कि इन लोगों ने पीड़िता के परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर, जल्दबाजी में शव का अंतिम संस्कार करवा दिया था।

परिजनों का दावा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि दोबारा पोस्टमॉर्टम की गुंजाइश खत्म हो जाए और रेप व मर्डर से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत नष्ट किए जा सकें।

पुलिस के अनुसार, निर्मल घोष पर निम्नलिखित गंभीर धाराएं लगाई गई हैं:

 * सबूत मिटाना: अपराध के निशानों को मिटाने का प्रयास।

* आपराधिक साजिश: साजिश के तहत मामले को दबाने की कोशिश।

 * दबाव बनाना: पीड़िता के परिवार को उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर करना।

घटना वाले दिन निर्मल घोष को आरजी कर अस्पताल में देखा गया था, जहाँ उन्होंने अस्पताल के तत्कालीन विवादित प्रिंसिपल संदीप घोष के साथ बैठक की थी।

इतना ही नहीं, जिस वाहन से डॉक्टर का शव श्मशान घाट ले जाया गया था, उसके साथ भी निर्मल घोष को मौजूद पाया गया था।

ओडिशा के बालासोर से हुई गिरफ्तारी

पीड़िता के पिता ने 10 अगस्त को इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एक नई शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में औपचारिक FIR में तब्दील कर दिया गया।

शिकायत मिलने के बाद हरकत में आई पुलिस ने दबिश देनी शुरू की।

13 अगस्त को बैरकपुर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर पड़ोसी राज्य ओडिशा के बालासोर स्थित एक होटल में छापेमारी की।

वहां से निर्मल घोष और संजीब मुखर्जी को हिरासत में लिया गया और फिर कोलकाता लाया गया।

इस मामले में कुल तीन नामजद आरोपी हैं, जिनमें से दो की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि तीसरा आरोपी सोमनाथ डे फिलहाल फरार चल रहा है।

पुलिस का कहना है कि वे कोर्ट से दोनों आरोपियों की 14 दिनों की पुलिस रिमांड की मांग करेंगे ताकि पूरे नेटवर्क और साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।

अंतिम संस्कार के एंगल की नए सिरे से जांच

दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अब तक की जांच में जल्दबाजी में किए गए अंतिम संस्कार का यह पहलू शामिल नहीं था।

9 अगस्त को पीड़िता की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले को उठाया।

उन्होंने बैरकपुर पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि शव के जल्दबाजी में हुए दाह-संस्कार और सबूतों को मिटाने की कोशिशों की नए सिरे से निष्पक्ष जांच की जाए।

इसी निर्देश के बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार से संपर्क किया और नई एफआईआर दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की।

कार्रवाई पर सरकार का बयान

मामले में हुई त्वरित गिरफ्तारियों के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बैरकपुर पुलिस की कार्यशैली की सराहना की।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को दूसरे राज्य से गिरफ्तार किया है और फरार आरोपी सोमनाथ डे को भी जल्द ही कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में लापरवाही बरतने और संदिग्धों को बचाने की कोशिश करने वाले तीन आईपीएस (IPS) अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

इसके अलावा, मामले में संलिप्त कुछ डॉक्टरों के मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन भी रद्द किए गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में अड़ंगा डालने की कोशिश करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।

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