Dhirendra Shastri on Swara Bhaskar: बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर द्वारा रानी पद्मावती के ऐतिहासिक ‘जौहर’ को लेकर दिए गए बयान के बाद देश में एक नई बहस छिड़ गई है।
इस बयान की चौतरफा आलोचना हो रही है और अब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) ने भी इस पर बेहद कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
पश्चिम बंगाल के हावड़ा (लीलुआ) में आयोजित ‘हनुमत कथा’ के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बिना सीधा नाम लिए स्वरा भास्कर के विचार का खंडन किया।

“आस्था का विरोध करने वाले क्या समझें समर्पण?”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जौहर किसी भी तरह से कायरता का प्रतीक नहीं है।
भारतीय इतिहास में जौहर वीरता, अटूट भक्ति, स्वाभिमान और अपने धर्म तथा पति के प्रति परम समर्पण का प्रतीक रहा है।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में कहा कि जो लोग देश की आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक जड़ों का विरोध करते हैं, वे कभी जौहर जैसी महान परंपरा के वास्तविक त्याग को समझ ही नहीं सकते।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान सदैव पूजनीय रहा है और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर देना कोई मामूली बात नहीं है।
वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें…
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्वरा भास्कर ने दिल्ली में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ नाम के एक टॉक शो में फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर सीन का जिक्र किया।
उन्होंने तर्क दिया कि फिल्मों में इस तरह के सीन्स दिखाने से समाज में गलत संदेश जाता है।
स्वरा के अनुसार, ऐसी फिल्में देखने के बाद बलात्कार या हिंसा से बचकर निकली महिलाओं (रेप सर्वाइवर्स) के मन में यह भाव आ सकता है कि जीवित रहना कायरता है।
स्वरा ने सवाल उठाया था कि क्या किसी महिला का जीवन उसकी शारीरिक पवित्रता से कम कीमती होता है?

विवाद पर सफाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
बयान वायरल होने और तीखी प्रतिक्रियाएं मिलने के बाद स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी सफाई जारी की।
उन्होंने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती या इतिहास की वीर महिलाओं को सीधे तौर पर कायर नहीं कहा था।
उनकी आपत्ति केवल इस बात पर थी कि क्या सिनेमा में मौत को जीवन से बड़ा दर्जा देना सही है।

हालाँकि, इस मुद्दे पर केवल धार्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि कई राजनीतिक हस्तियां भी आमने-सामने आ गईं।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने स्वरा के विचार से असहमति जताते हुए कहा कि आक्रांताओं के हाथों गुलाम बनने या सेक्स स्लेव बनने की जगह मौत को चुनना उन महिलाओं का अपना ऐतिहासिक निर्णय और स्वाभिमान का चुनाव था।

धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि चाहे उनके बोलने से किसी को ठेस लगे या आपत्ति हो, वे सनातन संस्कृति और देश के गौरवशाली इतिहास के समर्थन में सच बोलने से पीछे नहीं हटेंगे।
यह मामला अब सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
#SwaraBhaskar #DhirendraShastri #BageshwarDham #RaniPadmavati #JauharControversy #Padmaavat #SanatanDharma #BollywoodNews

