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UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में भारत की 5 नई साइट शामिल: इनमें MP के 4 प्रमुख स्थल, जानिए सभी 5 साइट की खासियत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP sites in UNESCO tentative list: भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक पहचान के लिए एक बहुत ही अच्छी खबर सामने आई है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की सांस्कृतिक संस्था UNESCO (यूनेस्को) ने अपनी ‘वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट’ (संभावित विश्व धरोहर सूची) में भारत की 5 नई साइटों को शामिल कर लिया है।

इन 5 नई साइटों में से 4 साइटें अकेले मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हैं, जबकि 5वीं एंट्री भारत और दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक स्थानों से जुड़ी ‘साइट्स ऑफ सत्याग्रह’ है।

इन नई प्रविष्टियों के साथ ही यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भारत की कुल साइटों की संख्या बढ़कर अब 78 हो गई है।

क्या होती है यूनेस्को की ‘टेंटेटिव लिस्ट’?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या टेंटेटिव लिस्ट में नाम आने का मतलब यह है कि उस जगह को ‘वर्ल्ड हेरिटेज साइट’ (विश्व धरोहर) घोषित कर दिया गया है? जवाब है—नहीं।

‘टेंटेटिव लिस्ट’ असल में एक संभावित या प्रस्तावित सूची होती है।

जब भी कोई देश अपने किसी ऐतिहासिक, प्राकृतिक या सांस्कृतिक स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाना चाहता है, तो सबसे पहले उसे यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल कराना अनिवार्य होता है।

इसके बाद ही यूनेस्को की टीम उन जगहों का बारीकी से अध्ययन करती है और आगे चलकर उन्हें ‘फाइनली’ वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया जाता है। यानी, यह वर्ल्ड हेरिटेज बनने का पहला और बेहद जरूरी कदम है।

मध्य प्रदेश की ये 4 साइटें हुई शामिल

1. उदयगिरि गुफाएं (विदिशा जिला)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 60 किलोमीटर दूर विदिशा जिले में स्थित उदयगिरि की गुफाएं अपनी प्राचीन स्थापत्य कला के लिए जानी जाती हैं। यहाँ कुल 20 गुफाएं मौजूद हैं।

 * खासियत: इन गुफाओं में मुख्य रूप से हिंदू धर्म से जुड़े मंदिर और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हैं, साथ ही यहाँ जैन धर्म से जुड़े अवशेष भी मिलते हैं।

 * भगवान विष्णु का वराह अवतार: उदयगिरि की सबसे प्रसिद्ध और आकर्षक कलाकृति भगवान विष्णु के ‘वराह अवतार’ की एक विशाल शैल-मूर्ति (चट्टान काटकर बनाई गई मूर्ति) है।

इसमें वराह रूप में भगवान विष्णु को समुद्र के जल से पृथ्वी (भूदेवी) को ऊपर उठाते हुए दर्शाया गया है।

यह मूर्ति गुप्त काल की उत्कृष्ट मूर्तिकला, धार्मिक आस्था और उस समय के शासन व्यवस्था को दर्शाती है।

2. बाघ गुफा चित्रकारी (धार जिला)

धार जिले के बाघ कस्बे के पास, विंध्याचल की पहाड़ियों में और बाघिनी नदी के किनारे बाघ की गुफाएं स्थित हैं। धार शहर से इनकी दूरी लगभग 97 किलोमीटर है।

 * खासियत: यहाँ चट्टानों को काटकर बनाई गई कुल 9 बौद्ध गुफाएं हैं। बाघ गुफाएं अपनी अनोखी भित्ति चित्रकारी (Wall Paintings) के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं।

 * चित्रकारी और तकनीक: इन चित्रों में इंसान, पशु-पक्षी, फूल-पत्तियां, सुंदर ज्यामितीय डिजाइन और उस समय के समाज एवं संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिलती है।

दीवारों पर चित्र बनाने से पहले मिट्टी और अन्य चीजों का प्लास्टर लगाया जाता था और फिर रंगों का उपयोग किया जाता था। इस तकनीक को ‘टेम्परा तकनीक’ कहा जाता है।

3. गिन्नौरगढ़ किला (रायसेन जिला)

भोपाल से करीब 60-65 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में स्थित गिन्नौरगढ़ किला एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक गोंड किला है।

* खासियत: यह किला रातापानी अभयारण्य के आसपास घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित है।

पुराने समय में गिन्नौरगढ़ गोंड राजाओं की एक बेहद सुरक्षित और प्रमुख किलेबंद राजधानी हुआ करता था।

 * सामरिक महत्व: चारों तरफ घने जंगल और प्राकृतिक रूप से सुरक्षित पहाड़ी पर बने होने के कारण यह किला सैन्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद मजबूत माना जाता था।

4. चंबल घाटी के मंदिर समूह (मुरैना जिला)

मुरैना जिले की चंबल घाटी में स्थित बटेश्वर, पदावली और ककर्मठ के मंदिरों का समूह मध्य भारत में ‘नागर शैली’ की मंदिर वास्तुकला के विकास का बेहतरीन उदाहरण है।

* खासियत: ये मंदिर मुख्य रूप से 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच बनाए गए थे। इनके निर्माण में गुर्जर-प्रतिहार और कच्छपघात राजवंशों का बड़ा योगदान रहा।

 * मंदिरों का वैभव: बटेश्वर में लगभग 200 से भी ज्यादा छोटे-छोटे मंदिरों का समूह है, पदावली अपनी पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है, और ककर्मठ का मंदिर नागर शैली के पूर्ण विकसित रूप को दिखाता है।

5वीं एंट्री: ‘साइट्स ऑफ सत्याग्रह’ (भारत और दक्षिण अफ्रीका)

पाँचवाँ नाम ‘साइट्स ऑफ सत्याग्रह’ है, जो भारत और दक्षिण अफ्रीका के 9 ऐतिहासिक स्थानों का एक समूह है।

यह समूह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के विकास और उनकी ऐतिहासिक यात्रा को दिखाता है।

सत्याग्रह की पहली शुरुआत महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में की थी, जिसके बाद भारत आकर यह देश के सबसे बड़े अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलनों का मुख्य आधार बना।

इन 9 प्रमुख स्थलों में शामिल हैं:

* दक्षिण अफ्रीका: पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन (Pietermaritzburg) और फीनिक्स सेटलमेंट (Phoenix Settlement)।

 * भारत: चंपारण (बिहार), साबरमती आश्रम (गुजरात), मणि भवन (मुंबई), हरिजन सेवक संघ (दिल्ली), सेवाग्राम आश्रम (वर्धा), आगा खान पैलेस (पुणे) और गांधी स्मृति (दिल्ली)।

इन सभी स्थानों ने गांधी जी के विचारों, प्रयोगों और उनके सत्याग्रह के आंदोलन को गढ़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

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