Supreme Court on rape case: राजधानी दिल्ली और NCR के इलाकों में नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा और कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट ने साफ लहजे में कहा है कि जब तक जघन्य अपराध करने वालों के मन में मौत का डर पैदा नहीं किया जाएगा, तब तक समाज से रेप जैसी घिनौनी सोच और वारदात को खत्म करना नामुमकिन है।
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन को सख्त लहजे में हिदायत दी।
अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर कड़े कदम उठाने का वक्त आ गया है।

पुलिस को सख्त हिदायत और अनुच्छेद 21 का जिक्र
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में जरा भी न हिचकिचाएं।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब पुलिस कठोर कदम उठाएगी, तो कुछ लोग संविधान के अनुच्छेद 21 यानी ‘मानव अधिकारों’ का हवाला देकर सवाल जरूर खड़े करेंगे।
लेकिन पुलिस को इन सब से बेपरवाह होकर केवल अपना फर्ज निभाना होगा और अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करना होगा।
इस गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय से 4 हफ्तों के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है।

48 दिनों के भीतर घटीं 3 बड़ी और दर्दनाक घटनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 4 अगस्त से 21 सितंबर के बीच घटी गैंगरेप की तीन बड़ी घटनाओं पर खुद संज्ञान (Sua Sponte) लिया था:
* चलती बस में दरिंदगी (4 अगस्त):
ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में सवार हुई 16 साल की नाबालिग के साथ चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
अपराधी करीब 47 किलोमीटर तक बस दौड़ाते रहे और फिर पीड़िता को कश्मीरी गेट पर छोड़कर फरार हो गए। बस के शीशों पर काले पर्दे टंगे थे।
* हत्या और गैंगरेप (12 सितंबर):
स्वरूप नगर इलाके में 16 साल की एक और नाबालिग के साथ गैंगरेप के बाद उसकी बेदर्दी से हत्या कर दी गई।
अगले दिन पीड़िता का शव एक खुले मैदान में मिला। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को पकड़ा, जिनमें 3 नाबालिग निकले।
* पार्क में फर्जी पुलिस वाले बनकर वारदात (21 सितंबर):
कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में अपने दोस्त के साथ बैठी 17 साल की छात्रा के साथ तीन युवकों ने खुद को पुलिस वाला बताकर रेप किया। पुलिस ने बाद में तीनों को गिरफ्तार किया।

अफसरों की जवाबदेही तय करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अंधेरी जगहें, सीसीटीवी कैमरों की कमी और गश्त न होना सार्वजनिक स्थानों को ‘हाई रिस्क ज़ोन’ बना देता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घटनाओं पर सिर्फ दुख जताने से काम नहीं चलेगा।
जिन अधिकारियों के कंधों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, अगर वे लापरवाही बरतते हैं तो उनकी सीधी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि आस्था कुंज पार्क के पास स्थित LSR कॉलेज की छात्राओं ने पहले भी छेड़छाड़ और उत्पीड़न की शिकायतें की थीं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
दिल्ली में डराते आंकड़े
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, केवल साल 2024 में ही दिल्ली में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत 1,553 मामले दर्ज किए गए।

इसका सीधा मतलब है कि दिल्ली में हर दिन औसतन 4 से अधिक बच्चे यौन अपराध का शिकार बन रहे हैं।
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