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मोबाइल टॉवर और वाई-फाई को ठेंगा: बिना सिम-इंटरनेट चलने वाली ‘LoRa’ तकनीक के जरिए सुरक्षा बलों से कैसे बच रहे आतंकी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

LoRa Device Terrorist Kashmir: जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी लगी है।

आतंकी अब सर्विलांस और ट्रैकिंग से बचने के लिए बिना इंटरनेट, सिम कार्ड या मोबाइल टॉवर के काम करने वाली LoRa (लॉन्ग रेंज) कम्युनिकेशन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।

29 सितंबर को बडगाम एनकाउंटर स्थल से बरामद उपकरणों में इस घातक तकनीक का हैंडसेट शामिल था।

पाकिस्तान सेना के SSG कमांडो रह चुके मूसा की मौत और इस नई तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा एजेंसियों में हाई अलर्ट जारी हो चुका है।

बिना इंटरनेट-टॉवर आतंकियों का नया ‘साइलेंट नेटवर्क’: बडगाम एनकाउंटर से बेनकाब हुई साजिश

जम्मू-कश्मीर के शांत जंगलों और सुदूर पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों की पैनी नजर और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से बचने के लिए आतंकी संगठनों ने संचार का नया और खतरनाक जरिया अपना लिया है।

29 सितंबर को बडगाम जिले के दूधपथरी इलाके में लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार कमांडर हाशिम मूसा (उर्फ मोहम्मद आसिफ/आसिफ फौजी) सेना और पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में मारा गया।

एनकाउंटर के बाद जब सुरक्षाबलों ने घटनास्थल की तलाशी ली, तो वहां से AK-47 राइफल और मैगजीन के साथ एक विशेष LoRa/Ultra डिवाइस हैंडसेट और मोबाइल फोन बरामद हुआ।

इस हाई-टेक डिवाइस की बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत अलर्ट जारी किया है।

जांच में सामने आया है कि आतंकी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रडार और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग से बचने के लिए पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क, सिम कार्ड और वाई-फाई को छोड़कर अब रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित इस अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं।

आखिर क्या है यह LoRa डिवाइस और कैसे करता है काम?

LoRa का पूरा नाम Long Range (लॉन्ग रेंज) है। यह एक कम पावर वाली रेडियो-फ्रीक्वेंसी आधारित कम्युनिकेशन तकनीक है।

आमतौर पर इसका इस्तेमाल अनलाइसेंस्ड रेडियो बैंड्स में होता है।

* बिना नेटवर्क काम: इस डिवाइस को चलने के लिए किसी मोबाइल टॉवर, इंटरनेट कनेक्शन या सिम कार्ड की आवश्यकता नहीं होती।

 * मेष नेटवर्क (Mesh Network): इस सिस्टम में हर हैंडसेट खुद एक छोटे टॉवर की तरह काम करता है। इसके जरिए टेक्स्ट मैसेज, जीपीएस लोकेशन और एन्क्रिप्टेड डेटा एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक बिना किसी बीच के सर्वर के भेजा जा सकता है।

* पकड़े जाने का शून्य खतरा: पारंपरिक मोबाइल सिग्नल और कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) को सुरक्षा एजेंसियां आसानी से इंटरसेप्ट कर लेती हैं।

लेकिन LoRa के लो-पावर रेडियो सिग्नलों को लोकेशन ट्रेस या इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल होता है।

सुरक्षा एजेंसियां अब यह जांचने में जुटी हैं कि जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे आतंकी नेटवर्क के बीच यह तकनीक किस हद तक फैल चुकी है और इसे जाम (Jam) या ट्रैक करने के क्या उपाय हो सकते हैं।

एनकाउंटर साइट से मिले लॉजिस्टिक्स और दवाइयों का बैग

29 सितंबर को बडगाम के दूधपथरी स्थित पलमैदान के जंगलों में मूसा की घेराबंदी कर उसे मार गिराया गया था।

एनकाउंटर के बाद सेना ने इलाके से एक पिट्ठू बैग भी बरामद किया, जिसमें रोटियां, दवाएं, सर्जिकल मास्क, बिस्किट और शहद की बोतल मिली।

बैग में मिली इन चीजों से साफ है कि स्थानीय स्तर पर आतंकियों को लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने वाला कोई ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क काम कर रहा था।

पुलिस अब उन लोगों की पहचान में जुटी है जिन्होंने यह सामान मूसा तक पहुंचाया था।

परवेज मुशर्रफ की VVIP सुरक्षा में रहा था मूसा

न्यूज एजेंसी और इंटेलिजेंस सूत्रों के अनुसार, मारे गए आतंकी हाशिम मूसा का आपराधिक व सैन्य बैकग्राउंड काफी चौंकाने वाला है:

 * पाक सेना का जवान:

मोहम्मद आसिफ उर्फ मूसा का जन्म 7 मार्च 1980 को हुआ था और वह साल 2000 में पाकिस्तान सेना (सर्विस नंबर PA-3106947) में भर्ती हुआ था। वह हवलदार के पद तक पहुंचा।

 * SSG कमांडो और VVIP सिक्योरिटी:

2005 में उसे पाक सेना की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) की 4 कमांडो ‘यलगार’ बटालियन में शामिल किया गया।

साल 2006 से 2009 के दौरान उसने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की VVIP सुरक्षा टीम में काम किया था।

 * घातक हमलों का मास्टरमाइंड:

पिछले पांच सालों से घाटी में सक्रिय मूसा दर्जनों बड़े आतंकी हमलों में शामिल रहा।

उसने अप्रैल 2023 के भट्टा दुरियां (पुंछ) हमला (5 जवान शहीद), मई 2023 का कांडी जंगल धमाका (5 कमांडो शहीद), दिसंबर 2023 का डेरा की गली हमला (4 जवान शहीद) और गंदेरबल के गगनगीर टनल प्रोजेक्ट कैंप पर हुए हमले की साजिश रची थी।

घाटी में मूसा के खात्मे के साथ ही एक खूंखार आतंकी नेटवर्क का अंत हुआ है, लेकिन LoRa जैसे तकनीकी उपकरणों का मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बन गया है।

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