Festive season inflation: दीपावली का त्योहार आते ही देश भर में बाजारों की रौनक बढ़ जाती है, लेकिन इस बार त्योहारी सीजन की चमक पर महंगाई का भारी साया मंडरा रहा है।
त्योहारों से ठीक पहले किराना, सूखे मेवे, मसाले, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम जिस तेजी से बढ़े हैं, उसने आम आदमी और मध्यम वर्ग के घर का पूरा बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
धनतेरस और दिवाली पर खरीदारी करने की प्लानिंग कर रहे लोगों को इस बार अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
रसोई का बिगड़ा गणित: चीनी से लेकर मसालों तक सब महंगा
त्योहारी सीजन में रसोई का बजट सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से गृहणियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
* चीनी के तेवर हुए तीखे: पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दामों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया है। कुछ दिन पहले जो चीनी घटकर 50 रुपए प्रति किलो पर आ गई थी, वह महज तीन दिनों के भीतर ही बढ़कर 58 से 62 रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई है।
* मसालों पर कमजोर मानसून की मार: इस साल कमजोर मानसून और खेतों में कम पैदावार की वजह से मसालों की फसल को बड़ा नुकसान हुआ है।
नतीजतन, पिछले 15 दिनों में जीरा, धनिया और हल्दी की कीमतें 15 फीसदी तक महंगी हो गई हैं।
जीरा अब बाजार में 300 से 350 रुपए, धनिया 280 रुपए और हल्दी 250 रुपए प्रति किलो के भाव बिक रही है।
* दाल और चावल भी हुए लाल: दालों और चावल की कीमतों में भी भारी उछाल आया है।
अरहर दाल 130 रुपए से बढ़कर 150 रुपए प्रति किलो हो गई है। वहीं मेथी दाना 10 फीसदी, छोले और काले चने 15 फीसदी तक महंगे हो गए हैं।
पिछले दो महीनों में चावल के दामों में सीधे तौर पर 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे अच्छी क्वालिटी का चावल 60 से 120 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है।
सूखे मेवे हुए लाल, गिफ्ट पैक की लागत बढ़ी
दिवाली के मौके पर रिश्तेदारों और दोस्तों को ड्राई फ्रूट्स या मिठाइयों के डिब्बे गिफ्ट करने की परंपरा है।
लेकिन इस साल बादाम, काजू, पिस्ता और अखरोट के दाम इतने बढ़ गए हैं कि गिफ्ट पैक तैयार करने का खर्च बहुत अधिक हो गया है।
दिल्ली के प्रसिद्ध थोक बाजार ‘खारी बावली’ के कारोबारियों के अनुसार, भारत में सूखे मेवों की एक बड़ी सप्लाई अफगानिस्तान, ईरान और अमेरिका से आयात पर निर्भर करती है।
डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी, विदेशी बाजारों में माल की कमी और बढ़ते ट्रांसपोर्ट खर्च की वजह से कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
बाजार में मेवों के थोਕ और खुदरा दाम इस प्रकार हैं:
* पिस्ता: पिस्ता इस सीजन का सबसे महंगा ड्राई फ्रूट बन गया है, जो सितंबर में 1,200 रुपए था वह अब उछलकर सीधे 1,800 से 1,900 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है।
* बादाम: जो बादाम पहले 900 रुपए प्रति किलो था, वह अब बढ़कर 1,200 रुपए प्रति किलो हो गया है।
* काजू: काजू की कीमत 1,000 रुपए से बढ़कर 1,100 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है।
* अखरोट गिरी: इसका भाव 1,350 रुपए से बढ़कर 1,500 रुपए प्रति किलो हो गया है।
क्यों आसमान छू रहे हैं दाम?
चीजों के इतने महंगे होने के पीछे कई मुख्य कारण जिम्मेदार हैं:
* सब्जियों और तेल की महंगाई: प्याज, खाद्य तेल और चावल के दाम बढ़ने से ओवरऑल सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ गई है।
* जमाखोरी की आशंका: कम पैदावार और भविष्य में कीमतें और बढ़ने की उम्मीद में कई बड़े कारोबारी और सप्लायर माल रोककर रख रहे हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो रही है।
* वैश्विक तनाव और आयात लागत: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की कमी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण आयातित सामान महंगा हो रहा है।
टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन भी हुई महंगी
त्योहारों के सीजन में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां बड़े-बड़े डिस्काउंट और ऑफर्स का विज्ञापन देती हैं, लेकिन इस बार खरीदारी से पहले ही कंपनियों ने अपने उत्पादों के दाम 8 से 10 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं।
पिछले साल की तुलना में इस बार फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन और अन्य होम अप्लायंसेज करीब 10 फीसदी ज्यादा महंगे मिल रहे हैं।
ऐसे में ग्राहकों को त्योहारों पर मिलने वाले तथाकथित डिस्काउंट का कोई खास फायदा मिलता नहीं दिख रहा है।
धनतेरस पर बर्तन खरीदना भी हुआ महंगा
धनतेरस पर तांबे, पीतल, एल्यूमीनियम और स्टील के बर्तन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार धातुओं की कीमतों में भारी आग लगी है।
तांबे और एल्यूमीनियम की कीमतों में 25 से 30 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हुई है, जबकि स्टेनलेस स्टील के दाम भी 15 फीसदी तक बढ़ चुके हैं।
धातुओं के महंगे होने से इस बार बर्तनों की खरीदारी करना भी आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है।
थाली की लागत भी बढ़ी
क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सितंबर महीने में एक आम शाकाहारी थाली की लागत पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी बढ़ गई है, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में भी 6 फीसदी का इजाफा हुआ है।
कुल मिलाकर, त्योहारों के इस सीजन में महंगाई के इस ‘डबल अटैक’ ने आम आदमी की खुशियों के रंग फीके कर दिए हैं और हर परिवार के महीने का बजट बिगाड़ दिया है।
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