MLA rest house security breach: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विधायकों की सुरक्षा को लेकर दो बड़े और हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं।
एक तरफ जहां एक विधायक के सरकारी कमरे में अजनबी लोग रंगरेलियां मनाते पकड़े गए, तो वहीं दूसरी तरफ एक अन्य विधायक के पॉश इलाके में स्थित बंगले को चोरों ने निशाना बना लिया।
इन दोनों घटनाओं ने राजधानी की वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आइए इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं।
कमरे का दरवाजा खुला और उड़ गए विधायक के होश
यह पूरा वाकया 2 नवंबर का है। उज्जैन जिले के महिदपुर से कांग्रेस विधायक दिनेश जैन ‘बॉस’ दिल्ली के अपने लंबे और थका देने वाले दौरे से लौट रहे थे।
सफर की थकान मिटाने और थोड़ा आराम करने के मकसद से वे सीधे भोपाल स्थित अपने विधायक विश्राम गृह (MLA Rest House) पहुंचे।
दोपहर के करीब 3 बज रहे थे। विधायक को विश्राम गृह के खंड क्रमांक-3 में कमरा नंबर 13 और 14 आवंटित किए गए हैं।
थकान से चूर विधायक ने जैसे ही अपने कमरे का दरवाजा खोला, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके अपने निजी और सुरक्षित माने जाने वाले कमरे में उन्हें ऐसा कुछ देखने को मिलेगा।
पुलिस की वर्दी में था जोड़ा, मौके से हुआ फरार
कमरे के अंदर का नजारा बेहद चौंकाने वाला था।
वहां एक युवक और युवती आपत्तिजनक हालत में मौजूद थे, और सबसे बड़ी हैरानी की बात यह थी कि दोनों ने पुलिस की वर्दी पहनी हुई थी।
अचानक विधायक को सामने देखकर दोनों बुरी तरह घबरा गए और उनके होश उड़ गए।
पकड़े जाने के डर से दोनों तुरंत विधायक के सामने हाथ-पैर जोड़ने लगे और अपनी गलती की माफी मांगने लगे।
विधायक अभी इस अचानक हुई घटना को समझ ही रहे थे और कोई कदम उठाने की सोच रहे थे कि इसी बीच दोनों युवक-युवती मौके का फायदा उठाकर वहां से रफूचक्कर हो गए।
कैसे घुसे अजनबी? सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने विधायक विश्राम गृह की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
विधायक दिनेश जैन ने इस लापरवाही पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बताया कि जब भी वह शहर से बाहर जाते हैं, तो उनके कमरों की चाबियां मुख्य काउंटर पर मौजूद केयरटेकर के पास जमा रहती हैं।
नियमों के मुताबिक, यह चाबी केवल साफ-सफाई या जरूरी रखरखाव के लिए ही कर्मचारियों को दी जानी चाहिए।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि किसी अनजान व्यक्ति को उनके कमरे की चाबी कैसे मिल गई?
विधायक का कहना है कि यह एक बहुत बड़ी लापरवाही है।
अगर कोई भी अनजान व्यक्ति इस तरह आसानी से कमरों में रुक सकता है, तो कल को कोई बड़ी आपराधिक साजिश या वारदात भी हो सकती है।
पीडब्ल्यूडी (PWD) ने शुरू की सख्त जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा सचिवालय ने तुरंत एक्शन लिया है।
सचिवालय के सख्त निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस पूरी घटना की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।
पीडब्ल्यूडी भोपाल के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा है कि यह घटना उनके संज्ञान में आ चुकी है।
विधायक के कमरे में बिना अनुमति के लोगों के घुसने और इस पूरी लापरवाही की बारीकी से जांच की जा रही है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि इस मामले में केयरटेकर या जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
श्यामला हिल्स में विधायक के बंगले पर चोरों का धावा
राजधानी में विधायकों की सुरक्षा से जुड़ी यह इकलौती घटना नहीं है।
भोपाल के सबसे पॉश और सुरक्षित माने जाने वाले श्यामला हिल्स इलाके में भी एक बड़ी वारदात हुई है।
यहां निवाड़ी से विधायक अनिल जैन का सरकारी बंगला है।
मिली जानकारी के मुताबिक, 3 और 4 नवंबर की दरम्यानी रात को बंगले पर कोई मौजूद नहीं था और वहां पूरी तरह सन्नाटा था।
इसी बात का फायदा उठाकर चोरों ने बंगले में सेंध लगा दी।
अगली सुबह जब बंगले का स्टाफ हमेशा की तरह काम पर लौटा, तो उन्हें घर का सामान बिखरा हुआ मिला और चोरी का पता चला।
खिड़की तोड़कर घुसे चोर, खंगाला पूरा घर
चोरों ने मुख्य दरवाजे की जगह खिड़की के रास्ते घर में घुसने की योजना बनाई थी। उन्होंने खिड़की के लोहे के सरिए तोड़े और अंदर दाखिल हो गए।
इसके बाद चोरों ने इत्मीनान से बंगले के कमरों की तलाशी ली। उन्हें जो भी कीमती सामान हाथ लगा, वे उसे समेटते गए।
चोर अपने साथ बंगले से एक बड़ी एलईडी (LED) टीवी, ड्रायफ्रूट्स (सूखे मेवे) के डिब्बे और एक चश्मा चुराकर ले गए।
पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध
स्टाफ द्वारा सूचना मिलते ही श्यामला हिल्स थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटना का जायजा लिया और अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने बंगले और आसपास के इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं। इन कैमरों में कुछ संदिग्ध लोग वारदात को अंजाम देते हुए कैद हो गए हैं।
फिलहाल पुलिस इन्हीं फुटेज के आधार पर चोरों की पहचान करने में जुटी है।
यह पता लगाया जा रहा है कि चोर किस रास्ते से बंगले तक पहुंचे थे और चोरी करने के बाद किस तरफ भागे हैं।
राजधानी भोपाल में एक के बाद एक हुई इन दोनों घटनाओं ने आम जनता से लेकर प्रशासन तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब विधायकों के विश्राम गृह और सरकारी बंगले ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन दोनों मामलों में कितनी जल्दी दोषियों को पकड़कर सजा दिला पाता है।
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