Twisha Sharma Death Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का हाई-प्रोफाइल ‘ट्विशा शर्मा मौत मामला’ इस समय पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस मामले में एक बड़ा कानूनी यू-टर्न आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत को पूरी तरह खारिज (रद्द) कर दिया है।
बुधवार देर रात जारी हुए 17 पन्नों के कड़े आदेश के बाद, गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम गिरिबाला सिंह के भोपाल स्थित घर पहुंच गई।

फिलहाल वहां जांच और पूछताछ का दौर चल रहा है और उनकी गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरी घटना 12 मई की रात की है, जब भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में रहने वाली ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
ट्विशा के ससुराल पक्ष (जिसमें उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह शामिल हैं) का कहना है कि ट्विशा ने आत्महत्या की थी।

दूसरी तरफ, ट्विशा के मायके वालों का आरोप सीधा और गंभीर है; उनका कहना है कि ट्विशा की हत्या की गई है और इसमें उनके पति तथा ससुराल वालों का हाथ है।
मौत के बाद इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब दिल्ली AIIMS की एक विशेष मेडिकल टीम ने भोपाल AIIMS में जाकर ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम (Re-Postmortem) किया।
यह दोबारा जांच मौत के 12 दिन बाद यानी 24 मई को हुई, जिसके बाद उसी शाम भदभदा श्मशान घाट में भारी गमगीन माहौल में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। उनके भाई, मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी।

हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को क्यों पलटा?
इससे पहले भोपाल की एक निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने 15 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे दी थी।
निचली अदालत का मानना था कि सिर्फ शादी के सात साल के भीतर मौत होने के आधार पर जमानत नहीं रोकी जा सकती और पति के खातों से ट्विशा को पैसे भी भेजे जाते थे।
लेकिन जब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तो माननीय उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड्स और सबूतों को देखने के बाद निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और मेडिकल साक्ष्यों का गहराई से अध्ययन नहीं किया।
हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां इस प्रकार हैं:
संदिग्ध चोटें: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि ट्विशा के शरीर पर फांसी के फंदे के अलावा भी कई चोटों के निशान थे।
मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये चोटें ऐसी नहीं थीं जो केवल शव को फंदे से नीचे उतारते समय लगी हों।
आरोपी पक्ष इन चोटों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

जांच में असहयोग और छवि खराब करने की कोशिश:
कोर्ट ने पाया कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। इसके उलट, आरोपियों ने मीडिया में बयानबाजी करके मृतका ट्विशा की छवि को धूमिल करने की कोशिश की, जिससे चल रही जांच प्रभावित हो सकती है।
गंभीर आरोप: गवाहों और परिवार के बयानों से साफ है कि ट्विशा पर उनकी सास और पति द्वारा गर्भपात (Abortion) कराने का भारी दबाव बनाया जा रहा था।
साथ ही उन्हें दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
इन्हीं सब वजहों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत की राहत देना बिल्कुल भी न्यायोचित नहीं है और कोर्ट ने पुराने जमानत आदेश को ‘क्वैश’ (रद्द) कर दिया।

CBI की ‘3D और 360 डिग्री’ हाईटेक जांच
अग्रिम जमानत रद्द होते ही एक्शन में आई सीबीआई की टीम गुरुवार को सीधे गिरिबाला सिंह के घर पहुंची। इस बार जांच का तरीका बेहद आधुनिक है।
सीबीआई की फॉरेंसिक और टेक्निकल टीम ने घर की पहली मंजिल (फर्स्ट फ्लोर) पर एक हाई-इंटेंसिटी वाला 3D लेजर कैमरा लगाया है।
इस आधुनिक तकनीक की मदद से दीवारों की सटीक ऊंचाई, कमरों का आकार और घटना स्थल की पूरी मैपिंग की जा रही है।
360 डिग्री एंगल पर पूरे घर की विजुअल रिकॉर्डिंग की जा रही है ताकि घटना की रात की परिस्थितियों का एक डिजिटल री-क्रिएशन (Digital Re-creation) किया जा सके और सच का पता लगाया जा सके।

कस्टडी में पति समर्थ सिंह: व्हाट्सऐप चैट्स खोल रहे राज
इस मामले के दूसरे मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह को कोर्ट में पेश करने के बाद सीबीआई पहले ही अपनी रिमांड पर ले चुकी है।
अदालत ने समर्थ को 29 मई तक सीबीआई की हिरासत में भेजा है।
सीबीआई की पूछताछ मुख्य रूप से 12 मई की रात की टाइमलाइन पर टिकी है।
एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि मौत से ठीक पहले और ठीक बाद समर्थ ने क्या-क्या किया, वह किन लोगों के संपर्क में था और जब वह फरार था, तो उसे किसने पनाह दी।

इस मामले में सबसे बड़ा सबूत ट्विशा के व्हाट्सऐप चैट्स हैं।
इन चैट्स से पता चलता है कि समर्थ अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था और गर्भ में पल रहे बच्चे को अपना मानने से इनकार करते हुए गर्भपात का दबाव डाल रहा था।
ट्विशा ने अपने मैसेज में कई बार अपने मायके वालों से गुहार लगाई थी कि उन्हें वहां से ले जाया जाए क्योंकि उनकी मानसिक प्रताड़ना बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है।

आगे क्या हो सकता है? (भविष्य की कानूनी राह)
1. गिरफ्तारी की पूरी संभावना:
चूंकि अब गिरिबाला सिंह के पास कोई कानूनी सुरक्षा कवच नहीं है, इसलिए सीबीआई पूछताछ के बाद उन्हें किसी भी वक्त गिरफ्तार कर सकती है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ‘कस्टोडियल इंटरोगेशन’ (हिरासत में पूछताछ) जरूरी मानी जा रही है।

2. डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों का मिलान:
सीबीआई आने वाले दिनों में मोबाइल के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), डिलीट किए गए चैट्स, सीसीटीवी फुटेज (जिसके साथ छेड़छाड़ का आरोप है) और दोनों पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का बारीकी से मिलान करेगी।
इस केस से जुड़े डॉक्टरों और मर्ग दर्ज करने वाले शुरुआती पुलिस अधिकारियों के बयान भी फिर से दर्ज किए जा रहे हैं।
3. सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना:
कानूनन आरोपी पक्ष के पास अब भी एक विकल्प बाकी है।
वे हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर कर सकते हैं और हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग कर सकते हैं।

फिलहाल, भोपाल का यह मामला पूरी तरह गरमाया हुआ है और सीबीआई की चौतरफा जांच से आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
