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जंतर-मंतर अब नहीं रहा धरना स्थल, गृह मंत्रालय ने बदला नियम; जानिए अब कहां होंगे प्रदर्शन और कैसे मिलेगी अनुमति

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Jantar Mantar protest site denotified: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar), जो दशकों से देश के कोने-कोने से आने वाले प्रदर्शनकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों के आंदोलन का मुख्य केंद्र रहा है, अब इतिहास बन चुका है।

केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों और आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाते हुए जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट (Protest Site) के रूप में पूरी तरह ‘डिनोटिफाई’ (Denotify) कर दिया है।

इसका साफ मतलब यह है कि अब इस ऐतिहासिक जगह पर किसी भी प्रकार का धरना, अनशन, नारेबाजी या विरोध प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह लुटियंस दिल्ली (Lutyens’ Delhi) का अति-संवेदनशील क्षेत्र होना और वहां लगने वाला भारी ट्रैफिक जाम है।

जंतर-मंतर के आसपास कई अहम मंत्रालय, वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट और व्यावसायिक गतिविधियां होने के कारण आम नागरिकों को आए दिन भारी ट्रैफिक की समस्या से जूझना पड़ता था।

इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस इलाके में लगातार होने वाले भीड़भाड़ और जमावड़े को सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण माना था।

इन्ही तमाम पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के बाद गृह मंत्रालय द्वारा गठित कमेटी की सिफारिश पर इसे धरना स्थल के रूप में बंद करने का निर्णय लिया गया।

अब दिल्ली में इन 3 जगहों पर ही होंगे प्रदर्शन

आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और शहर की व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार ने विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नए और सुरक्षित स्थान तय किए हैं:

* रामलीला मैदान (Ramlila Maidan):

मध्य दिल्ली में स्थित यह ऐतिहासिक मैदान हमेशा से बड़ी रैलियों, जनसभाओं और विशाल प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। बड़े आंदोलनों के लिए इसे मुख्य जगह बनाया गया है।

* निरंकारी ग्राउंड, बुराड़ी (Burari Ground):

उत्तर-पूर्वी दिल्ली का यह विशाल मैदान बड़े जनसमूह वाले आंदोलनों, किसानों और मजदूरों के लंबे समय तक चलने वाले धरनों के लिए आरक्षित किया गया है।

* सीबीडी ग्राउंड, शाहदरा (CBD Ground, Shahdara):

पूर्वी दिल्ली में स्थित सेंट्रल बिजनेस District (CBD) ग्राउंड को भी आधिकारिक तौर पर नए प्रदर्शन स्थल के रूप में चुना गया है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इन तीनों स्थानों पर प्रदर्शन या धरना आयोजित करने के लिए एक विस्तृत एसओपी (SOP – Standard Operating Procedure) अलग से जारी की जाएगी।

यह नया नियम 28 अप्रैल 2022 को जारी किए गए पुराने आदेश का ही संशोधित रूप है।

बिना अनुमति के प्रदर्शन होगा कानूनन अपराध

नए नियमों के लागू होने के बाद अब बिना पूर्व अनुमति के दिल्ली के किसी भी अन्य स्थान पर इकट्ठा होना या प्रदर्शन करना कानूनन अपराध माना जाएगा।

आयोजकों को अब इन तीन तयशुदा स्थानों में से किसी एक पर कार्यक्रम करने के लिए दिल्ली पुलिस प्रशासन से आधिकारिक अनुमति लेनी होगी।

इस फैसले के बाद से ही जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी तरह के अनाधिकृत जमावड़े को तुरंत रोका जा सके।

प्रतिक्रियाएं और आगे की स्थिति

हाल के दिनों में भी जंतर-मंतर कई बड़े आयोजनों का गवाह रहा है।

हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना पहला आंदोलन यहीं से शुरू किया था, जब पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे।

इस नए फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार भले ही एक जगह को बंद कर दे, लेकिन नागरिकों के अधिकार नहीं दबेंगे और अब “पूरा देश ही जंतर-मंतर बनेगा।”

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