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दुश्मन के ड्रोन का काल बना भारत का लेजर वेपन! DRDO ने तैयार किया 5 किमी तक सटीक वार करने वाला 30kW का स्वदेशी सिस्टम

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

DRDO Laser Weapon: भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने देश की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है।

DRDO ने 30 किलोवाट (kW) क्षमता वाला एक बेहद शक्तिशाली स्वदेशी ‘लेजर वेपन सिस्टम’ (Directed Energy Weapon) तैयार किया है।

यह आधुनिक हथियार लगभग 5 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन के ड्रोन, ड्रोन के पूरे झुंड और निगरानी करने वाले सेंसरों को आसानी से नष्ट कर सकता है।

सफल ट्रायल और प्रोडक्शन की योजना

इस शक्तिशाली लेजर वेपन का अंतिम और महत्वपूर्ण ट्रायल अगस्त 2025 में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

इससे पहले, अप्रैल 2025 में आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित ‘नेशनल ओपन एयर रेंज’ में इसका परीक्षण किया गया था।

इस ट्रायल के दौरान लेजर वेपन ने तेजी से उड़ने वाले फिक्स्ड-विंग ड्रोन और कई तरह के हवाई खतरों को पलक झपकते ही हवा में ही ढेर कर दिया।

इतना ही नहीं, इसने दुश्मन के राडार सेंसरों और एंटीना को भी सटीक निशाना बनाया।

अब सेना को यह हथियार जल्द से जल्द सौंपने के लिए अगले छह महीनों के भीतर किसी भारतीय निजी या सरकारी कंपनी के साथ मिलकर इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन (Mass Production) की तैयारी चल रही है।

लाइट की स्पीड से वार, रडार से पहचान

यह लेजर वेपन सिस्टम बेहद एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर काम करता है।

सबसे पहले यह अपने साथ जुड़े रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिक (EO) सिस्टम की मदद से हवा में उड़ रहे दुश्मन के ड्रोन या मिसाइल की पहचान करता है।

जैसे ही लक्ष्य तय होता है, यह वेपन प्रकाश की गति (Speed of Light) से उस पर एक बेहद तेज और गर्म लेजर बीम छोड़ता है।

यह लेजर बीम इतनी प्रचंड ऊर्जा से भरी होती है कि दुश्मन का ड्रोन सेकंडों में जलकर खाक हो जाता है या उसका इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम पूरी तरह ठप हो जाता है।

बिना मिसाइल और गोलियों का हथियार: सेना को क्या फायदा?

पारंपरिक हथियारों में महंगे रॉकेट, मिसाइल या बारूद की गोलियों की जरूरत होती है।

जब दुश्मन एक साथ दर्जनों ड्रोन (Swarm Drones) से हमला करता है, तो हर ड्रोन पर एक महंगी मिसाइल दागना बेहद खर्चीला साबित होता है।

लेकिन लेजर सिस्टम में किसी गोला-बारूद की जरूरत नहीं पड़ती। यह केवल बिजली से चलता है।

जब तक सिस्टम को बिजली मिलती रहेगी, यह अनगिनत बार फायर कर सकता है।

इसका मतलब है कि भारतीय सेना अब बेहद कम लागत में दुश्मन के बड़े से बड़े ड्रोन हमले को नाकाम कर सकेगी।

2kW और 10kW तैयार, 50kW और 100kW पर जारी है काम

DRDO केवल इसी मॉडल तक सीमित नहीं है। भारत ने छोटे स्तर पर 2kW क्षमता वाले लेजर सिस्टम का उत्पादन पहले ही शुरू कर दिया है।

इसके अलावा 10kW क्षमता वाले सिस्टम (जो 2 किमी दूर तक वार कर सकता है) को जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं और इसके 10 से 12 यूनिट का ऑर्डर भी दिया जा चुका है।

भविष्य की तैयारियों को देखते हुए DRDO अब 50kW और 100kW क्षमता वाले और भी घातक लेजर हथियारों पर तेजी से काम कर रहा है।

आने वाले समय में इन्हें भारतीय एयर डिफेंस, मिसाइल शील्ड और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के साथ जोड़कर सीमा पर तैनात किया जाएगा।

ग्लोबल रेस में भारत की मजबूत धमक

डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों (DEW) की इस रेस में भारत अब दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।

अमेरिका अपने लेजर एंटी-ड्रोन सिस्टम का पहले ही इस्तेमाल कर रहा है।

इजराइल 100kW क्षमता वाले ‘आयरन बीम’ पर काम कर रहा है। वहीं चीन के पास ‘साइलेंट हंटर’ और ‘LY-1’ जैसे लेजर वेपन हैं।

DRDO के इस 30kW सिस्टम के साथ भारत ने भी साबित कर दिया है कि वह आधुनिक रक्षा तकनीक में किसी से पीछे नहीं है।

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