BJP Ministers workers complaint: मध्य प्रदेश में अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं को अपने ही मंत्रियों से मिलने या अपनी समस्याएं बताने के लिए सरकारी दफ्तरों या बंगलों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
अक्सर यह देखा जाता है कि सरकार बनने के बाद जमीन पर काम करने वाले आम कार्यकर्ताओं की मंत्रियों तक सीधी पहुंच कम हो जाती है।
उनकी इस परेशानी को दूर करने के लिए प्रदेश भाजपा संगठन ने एक बेहद खास और नया कदम उठाया है।
अब प्रदेश सरकार के मंत्री खुद भाजपा कार्यालय में आकर बैठेंगे और कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे।

पार्टी ने इसके लिए नवंबर 2026 का पूरा शेड्यूल और रोस्टर तैयार कर लिया है, जिससे सरकार और संगठन के बीच एक मजबूत पुल बनाया जा सके।
कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में होगा आयोजित
यह पूरा कार्यक्रम राजधानी भोपाल स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित किया जाएगा।
तय किए गए कार्यक्रम के मुताबिक, यह अभियान 2 नवंबर से शुरू होकर 30 नवंबर 2026 तक चलेगा।
इस पूरे महीने में कुल 14 दिन ऐसे चुने गए हैं, जिनमें मंत्रियों की ड्यूटी पार्टी कार्यालय में लगाई गई है।
इस दौरान मंत्री दोपहर 1 बजे से लेकर 3 बजे तक, यानी पूरे दो घंटे तक कार्यालय में मौजूद रहेंगे।

पार्टी नेतृत्व ने यह शेड्यूल बनाते वक्त शनिवार, रविवार और त्योहारों की सरकारी छुट्टियों का भी खास ध्यान रखा है, ताकि कार्यकर्ताओं और मंत्रियों दोनों को किसी तरह की असुविधा न हो।
शुरुआती दिनों में रोस्टर को इस तरह से बनाया गया है कि दो-दो मंत्रियों का समूह कार्यालय में मौजूद रहे, जबकि कुछ तारीखों पर एक मंत्री अकेले ही कार्यकर्ताओं से रूबरू होंगे।
क्या है इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य?
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा मकसद सरकार और पार्टी संगठन के बीच तालमेल को बेहतर करना है।
किसी भी राजनीतिक दल के लिए उसका जमीनी कार्यकर्ता सबसे अहम कड़ी होता है।
कई बार कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों से जुड़ी मांगों या संगठन से संबंधित शिकायतों को लेकर मंत्रियों तक पहुंचना चाहते हैं, लेकिन व्यस्तता या प्रोटोकॉल के चलते उनकी मुलाकात नहीं हो पाती।

अब इस नई व्यवस्था के तहत कार्यकर्ताओं को एक तय समय और जगह मिलेगी।
वे बिना किसी झिझक के सीधे अपने मंत्रियों के सामने बैठकर अपनी बात रख सकेंगे। इससे मंत्रियों को भी सीधे तौर पर जमीनी हकीकत और जनता के बीच चल रहे मुद्दों का फीडबैक मिलेगा।
संगठन के पदाधिकारियों को भी यह समझने में आसानी होगी कि किन इलाकों में किस तरह की समस्याएं ज्यादा आ रही हैं और सरकारी विभागों का कामकाज कैसा चल रहा है।
क्या आम जनता भी इस दरबार में जा सकेगी?
इस कार्यक्रम को लेकर एक बात बिल्कुल स्पष्ट कर दी गई है कि यह कोई सरकारी जनसुनवाई या आम जनता के लिए लगाया गया खुला दरबार नहीं है।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से केवल भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए डिजाइन किया गया है।
इसका फोकस पूरी तरह से पार्टी से जुड़े लोगों की शिकायतें और सुझाव सुनने पर है।

फिलहाल, आम नागरिकों के लिए इस कार्यक्रम में शामिल होने की कोई अलग से व्यवस्था नहीं की गई है। इसलिए, इसे सरकार की आम जनसुनवाई से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
जानें किस दिन कौन से मंत्री सुनेंगे शिकायतें (पूरा शेड्यूल)
भाजपा प्रदेश संगठन ने जो रोस्टर जारी किया है, उसके अनुसार नवंबर 2026 में मंत्रियों की बैठकों का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:
* 2 नवंबर: जगदीश देवड़ा और गौतम टेटवाल
* 3 नवंबर: राकेश सिंह और दिलीप अहिरवार
* 4 नवंबर: विश्वास सारंग और लखन पटेल
* 5 नवंबर: कैलाश विजयवर्गीय और प्रतिमा बागरी
* 12 नवंबर: करण सिंह वर्मा और नरेंद्र शिवाजी पटेल
* 16 नवंबर: तुलसी सिलावट और नारायण सिंह कुशवाह
* 17 नवंबर: प्रद्युम्न सिंह तोमर और धर्मेंद्र भावसिंह लोधी
* 18 नवंबर: गोविंद सिंह राजपूत और संपतिया उइके
* 19 नवंबर: उदय प्रताप सिंह और निर्मला भूरिया
* 23 नवंबर: इंदर सिंह परमार और नागर सिंह चौहान
* 24 नवंबर: कुंवर विजय शाह (साथ में अन्य मंत्री)
* 25 नवंबर: राकेश शुक्ला
* 26 नवंबर: चेतन कश्यप
* 30 नवंबर: कृष्णा गौर और दिलीप जायसवाल

समाधान की कितनी है उम्मीद?
पार्टी की इस पहल से कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
जो कार्यकर्ता महीनों से अपनी बात मंत्रियों तक पहुंचाने का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अब एक सीधा और आसान रास्ता मिल गया है।
सरकारी विभागों से जुड़े मसले हों, या फिर स्थानीय राजनीति से जुड़ी कोई उलझन, अब सब कुछ सीधे मंत्रियों के टेबल पर होगा।
हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कार्यकर्ता जो शिकायतें लेकर आएंगे, उनका निपटारा कितनी जल्दी और कितने प्रभावी ढंग से होगा।
पार्टी ने मंत्रियों के बैठने का कार्यक्रम तो जारी कर दिया है, लेकिन शिकायतों के समाधान के लिए क्या कोई डेडलाइन तय की गई है, यह आने वाले वक्त में ही साफ हो पाएगा।
फिलहाल, इस कदम से मध्य प्रदेश भाजपा ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि वह अपने कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं करना चाहती और सरकार तथा संगठन के बीच एक सीधा और मजबूत संवाद स्थापित करने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
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