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हर्षा रिछारिया के संन्यास पर मचा बवाल, संत समिति की मांग- दीक्षा देने वाले महाराज की जांच हो

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Harsha Richhariya Sant Anilanand Controversy: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई उत्सव नहीं बल्कि एक विवाद है।

पूर्व मॉडल और अभिनेत्री हर्षा रिछारिया ने हाल ही में संन्यास ले लिया है और अब वे स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी।

उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने उन्हें पूरे विधि-विधान से दीक्षा दिलाई।

लेकिन, जैसे ही यह खबर सामने आई, मध्य प्रदेश के संत समाज में खलबली मच गई है।

अनिलानंद महाराज की कड़ी आपत्ति

मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने इस संन्यास को पूरी तरह से गलत ठहराया है।

उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह सनातन धर्म की मर्यादाओं का मजाक उड़ाने जैसा है।

महाराज ने एक पुरानी कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि “900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती।”

उनका इशारा हर्षा के पिछले जीवन और उनके द्वारा दिए गए पुराने बयानों की तरफ था।

पुराने विवादों ने पकड़ा तूल

महाराज अनिलानंद का आरोप है कि हर्षा रिछारिया का इतिहास विवादों से भरा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि हर्षा ने पूर्व में प्रयागराज कुंभ के दौरान भी संन्यास की बात कही थी, लेकिन उसके बाद उन्होंने सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं।

महाराज का कहना है कि जो व्यक्ति धर्म का अपमान कर चुका हो, उसे इतनी आसानी से संन्यास की दीक्षा देना संदेहास्पद है।

दीक्षा देने वाले गुरु पर भी सवाल

यह विवाद केवल हर्षा तक सीमित नहीं रहा।

अनिलानंद महाराज ने महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज पर भी सवाल खड़े किए हैं, जिन्होंने हर्षा को दीक्षा दी।

उन्होंने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।

उनके अनुसार, संन्यास कोई “इंस्टेंट कॉफी” नहीं है जिसे जब चाहे तब बना लिया जाए।

यह एक कठिन साधना है जिसके लिए बचपन से ही कठोर अनुशासन और नियमों का पालन करना पड़ता है।

अखाड़ा परिषद और सरकार से अपील

संत समिति ने अब इस मामले में अखाड़ा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है।

महाराज ने चेतावनी दी है कि उज्जैन में आने वाले समय में बड़े धार्मिक आयोजन होने हैं, ऐसे में परंपराओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने राज्य सरकार का हवाला देते हुए कहा कि धर्म की शुद्धता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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