Mobile Minor Mode for Kids: आजकल सोशल मीडिया पर ऐसी कई वीडियो और रील्स देखने को मिलती हैं, जहाँ छोटे-छोटे बच्चे मोबाइल न मिलने पर बुरी तरह चिल्लाते, रोते या घरवालों पर हाथ उठाते नजर आते हैं।
हाल ही में वायरल हुई एक वीडियो में 10 साल का बच्चा अपनी माँ को सिर्फ इसलिए मारता दिख रहा था क्योंकि माँ ने उससे फोन छीन लिया था।
यह सिर्फ एक-दो परिवारों की कहानी नहीं है, बल्कि देश के लाखों घरों की सच्चाई बन चुकी है।
मोबाइल की यह लत बच्चों को न सिर्फ चिड़चिड़ा बना रही है, बल्कि उनके व्यवहार में हिंसक बदलाव भी ला रही है।

बच्चों को इसी डिजिटल जाल से बाहर निकालने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की योजना बना रही है।
सरकार स्मार्टफोन में ‘माइनर मोड’ (Minor Mode) नाम का एक नया सेफ्टी फीचर लाने पर विचार कर रही है।
क्या है यह ‘माइनर मोड’?
माइनर मोड असल में स्मार्टफोन के भीतर मिलने वाला एक खास सुरक्षा कवच होगा, जिसे बच्चों की उम्र और उनकी डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
आने वाले समय में देश में बिकने वाले सभी नए स्मार्टफोन्स में यह फीचर देना कंपनियों के लिए अनिवार्य किया जा सकता है।

इस मोड के तहत मोबाइल बनाने वाली कंपनियों और ऐप डेवलपर्स को ऐसे सेफ्टी फीचर्स देने होंगे, जिससे बच्चों के स्क्रीन टाइम और उनके द्वारा देखे जाने वाले कंटेंट पर लगाम लगाई जा सके।
हालांकि, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और इमरजेंसी कॉलिंग जैसी जरूरी सुविधाओं पर कोई रोक नहीं होगी।
माइनर मोड में मिलेंगे यह शानदार फीचर्स
अगर यह फीचर लागू होता है, तो पैरेंट्स के हाथ में अपने बच्चों के फोन इस्तेमाल का पूरा रिमोट कंट्रोल आ जाएगा:
* स्क्रीन टाइम की समय-सीमा: पैरेंट्स तय कर सकेंगे कि बच्चा पूरे दिन में कितनी देर फोन इस्तेमाल करेगा। जैसे ही 1 या 2 घंटे का सेट किया गया समय खत्म होगा, फोन के ऐप्स अपने आप लॉक हो जाएंगे।
* नाइट कर्फ्यू लागू होना: देर रात तक जगकर फोन चलाने की आदत पर रोक लगाने के लिए ‘नाइट कर्फ्यू’ फीचर होगा। इसके तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक इंटरनेट और मनोरंजन वाले ऐप्स काम नहीं करेंगे।
* कंटेंट पर फिल्टर: बच्चों की उम्र के हिसाब से ही उन्हें इंटरनेट पर सामग्री (कंटेंट) दिखाई जाएगी। एडल्ट, हिंसक या किसी भी तरह के नुकसानदेह कंटेंट को यह फीचर अपने आप ब्लॉक कर देगा।
* बिना इजाजत ऐप डाउनलोड नहीं: बच्चे अपनी मर्जी से कोई भी नया गेम या सोशल मीडिया ऐप डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें पहले पैरेंट्स की मंजूरी लेनी होगी।

जब तक माइनर मोड नहीं आता, तब तक क्या करें?
अगर सरकार इस नियम को लागू करने में थोड़ा समय लेती है, तब भी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।
अभी भी एंड्रॉइड और आईफोन में ऐसे कई टूल्स मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप बच्चों की फोन की लत को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं:
* गूगल फैमिली लिंक (Google Family Link): एंड्रॉइड यूजर्स के लिए यह बेहद उपयोगी ऐप है। इससे आप अपने फोन से ही बच्चे के फोन का स्क्रीन टाइम लॉक कर सकते हैं और लोकेशन भी ट्रैक कर सकते हैं।
* डिजिटल वेलबीइंग (Digital Wellbeing): यह हर एंड्रॉइड फोन की सेटिंग्स में इन-बिल्ट मिलता है। यहाँ से आप यूट्यूब, इंस्टाग्राम या गेम्स के लिए डेली टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं।
* स्क्रीन टाइम (iOS Screen Time): अगर आपका बच्चा आईफोन या आईपैड इस्तेमाल करता है, तो सेटिंग्स में मौजूद ‘Screen Time’ विकल्प से आप कंटेंट फिल्टरिंग और ऐप डाउनलोड पर पूरी पाबंदी लगा सकते हैं।

बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए तकनीक पर सही नियंत्रण बेहद जरूरी है, और ‘माइनर मोड’ इस दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
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