Homeन्यूजबिजली कंपनियों की मनमानी खत्म: बिना बताए 4 घंटे बिजली कटी, तो...

बिजली कंपनियों की मनमानी खत्म: बिना बताए 4 घंटे बिजली कटी, तो जेब से भरना होगा हर्जाना, सीधे बिल में जुड़कर आएगा पैसा

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Electricity Compensation Rule: मध्य प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर आ रही है।

अगर आपके इलाके में बार-बार या लंबे समय तक बिजली कटती है और आप शिकायत कर-करके थक चुके हैं, तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।

सरकार एक ऐसा नया और कड़ा नियम लागू करने जा रही है, जिसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली गुल होने पर कंपनियों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।

सबसे अच्छी बात यह है कि अब इस मुआवजे (हर्जाने) को पाने के लिए आपको सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने या अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ने की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी।

यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक होगी और मुआवजा सीधे आपके बिजली खाते या अगले महीने के बिल में डिस्काउंट के रूप में जोड़ दिया जाएगा।

क्या है नया नियम और कब से होगा लागू?

दरअसल, सरकार नया इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 लेकर आ रही है।

इस नए संशोधन बिल की धारा 58 में बहुत महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

इस बदलाव का सीधा मकसद बिजली सप्लाई की क्वालिटी को सुधारना और उसे ठीक करने के लिए कंपनियों की जवाबदेही तय करना है।

अब तक बिजली कंपनियां बिजली कटौती के बाद कोई न कोई बहाना बनाकर बच निकलती थीं।

लेकिन नए नियम के तहत, अगर किसी इलाके में तय सीमा से ज्यादा देर तक बिजली कटी, तो बिजली कंपनी की गलती मानते हुए हर्जाने की प्रक्रिया खुद-ब-खुद (ऑटोमैटिक) शुरू हो जाएगी।

स्मार्ट मीटर खोलेंगे बिजली कंपनियों की पोल

अक्सर जब उपभोक्ता लंबी बिजली कटौती की शिकायत करते हैं, तो बिजली कंपनियां यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती हैं कि “बिजली तो सिर्फ 10-15 मिनट के लिए ही गई थी।”

लेकिन अब डिजिटल जमाना है और कंपनियों का यह झूठ नहीं चल पाएगा।

राज्य में तेजी से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के सबसे बड़े मददगार बनेंगे।

स्मार्ट मीटर की मदद से बिजली कब गई और कब वापस आई, इसका एक-एक सेकंड का सटीक डेटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाएगा।

इस डिजिटल रिकॉर्ड में कोई भी हेरफेर नहीं किया जा सकेगा। इसी डेटा के आधार पर सॉफ्टवेयर खुद तय करेगा कि उपभोक्ता को कितना मुआवजा मिलना चाहिए।

जानिए, खराबी ठीक करने के लिए क्या हैं मौजूदा नियम और समय-सीमा?

विद्युत नियम, 2020 के अनुसार, अलग-अलग तरह के फॉल्ट (खराबियों) को ठीक करने के लिए शहरों और गांवों के हिसाब से समय-सीमा (Deadlines) तय की गई है।

अगर कंपनियां इस समय के भीतर बिजली सप्लाई चालू नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें हर घंटे के हिसाब से **25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना** देना होगा।

नीचे दी गई तालिका से समझें कि किस खराबी को ठीक करने के लिए कंपनियों के पास कितना समय होता है:

खराबी का प्रकार | शहर के लिए समय-सीमा | ग्रामीण क्षेत्र के लिए समय-सीमा

  • सामान्य फॉल्ट (जैसे- फ्यूज उड़ना या तार टूटना) 1 से 3 घंटे | 4 घंटे
  • ट्रांसफार्मर जलना या खराब होना- 12 घंटे | 12 घंटे
  • बिना पूर्व सूचना के बिजली कटना- 2 घंटे | 4 घंटे

नोट: यदि आपके इलाके में बिना किसी एडवांस नोटिस के 4 घंटे से ज्यादा समय तक बिजली गुल रहती है, तो आप वर्तमान व्यवस्था में भी सीधे उपभोक्ता फोरम से मुआवजे की मांग कर सकते हैं।

बिजली गुल होने पर उपभोक्ता इन 4 बातों का जरूर रखें ध्यान

अगर आपके इलाके में तय समय से ज्यादा देर तक बिजली कटी है और कंपनी ने आपके अगले महीने के बिल में मुआवजा नहीं जोड़ा है, तो आपको यह कदम उठाने चाहिए:

1. शिकायत दर्ज कराएं: बिजली कटने पर तुरंत कंपनी के टोल-फ्री नंबर या ऐप पर अपनी शिकायत दर्ज करें और कंप्लेंट नंबर सुरक्षित रखें।

2. स्मार्ट मीटर का डेटा: अपने स्मार्ट मीटर की रीडिंग या बिजली कटने-आने का समय नोट करके रखें।

3. उपभोक्ता फोरम का रुख करें: अगर कंपनी मुआवजा नहीं देती है, तो आप ‘उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम’ (CGRF) में अपनी शिकायत दे सकते हैं।

4. 45 दिनों में समाधान: इस फोरम के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य है कि वह आपकी शिकायत मिलने के 45 दिनों के भीतर उसका पूरा समाधान करे।

इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांड़ो का कहना है कि बिजली से जुड़े जो भी नियम तय किए गए हैं, उनका पूरी तरह से पालन कराया जाएगा।

नए बिल के तहत जैसे ही उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने का कानूनी अधिकार मिलेगा, पात्र लोगों को उसका फायदा हर हाल में दिया जाएगा।

#ElectricityRules #MPNews #ConsumerRights #powercut #PowerCutCompensation #SmartMeter

- Advertisement -spot_img