MP Rain Chitrakoot Flood: मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।
सबसे ज्यादा खराब हालात सतना, चित्रकूट, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में देखने को मिल रहे हैं।
धार्मिक नगरी चित्रकूट में तो बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। यहां गोरगी बांध फटने के कारण कई इलाकों में पानी तेज़ी से भर गया, जिससे चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल है।
लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सड़कों पर गाड़ियों की जगह नावें चलती हुई दिखाई दे रही हैं।
प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं।
चित्रकूट में 25 फीट ऊपर बह रही मंदाकिनी
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर इतनी तेज़ी से बढ़ा कि पानी बड़े पुल तक पहुंच गया है।
नदी का पानी करीब 25 फीट ऊपर तक उफान मार रहा है, जिससे 25 फीट ऊंचा बड़ा पुल भी डूबने की कगार पर आ गया है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले रामघाट और भारत घाट पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं।
घाट के किनारे मौजूद लगभग 400 दुकानें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारी अपनी दुकानों से सामान सुरक्षित निकालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज है कि अधिकांश सामान बह गया या खराब हो चुका है।
नयागांव स्थित राजमहल के अंदर तक बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।
धार्मिक स्थलों का संपर्क टूटा, परिक्रमा मार्ग प्रभावित
चित्रकूट के कई प्रसिद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र भी इस बाढ़ से अछूते नहीं रहे हैं।
आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी और सती अनसुइया जैसे प्रमुख स्थलों पर भारी जलभराव हो चुका है।
सती अनसुइया आश्रम के पास पानी का स्तर सुरक्षा रेलिंग तक पहुंच गया है।
श्रद्धालुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले परिक्रमा मार्ग पर पुरानी लंका तिराहे के पास कई फीट गहरा पानी भरा हुआ है, जिससे आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने हाल के वर्षों में ऐसी भयंकर बाढ़ नहीं देखी।
हालांकि, कुछ दिन पहले 17 अगस्त को भी चित्रकूट में जलभराव की स्थिति बनी थी, लेकिन इस बार के हालात उससे कहीं ज्यादा गंभीर और चिंताजनक हैं।
रेलवे ट्रैक डूबा, थाना और पेट्रोल पंपों में घुसा पानी
बारिश और बाढ़ का असर सिर्फ आवासीय इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यातायात और सरकारी व्यवस्थाएं भी ठप हो गई हैं।
सतना के मझगवां क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पानी में डूब गया है।
इसके कारण आनंद विहार से रीवा जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को कई घंटों तक रास्ते में ही खड़ा रखना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
नागौद क्षेत्र में स्थिति इतनी खराब हो गई कि स्थानीय पुलिस थाने और पेट्रोल पंप के अंदर तक पानी भर गया।
कई प्रमुख सड़कें और संपर्क मार्ग पानी में डूब जाने के कारण बंद कर दिए गए हैं।
बिजली के खंभे और ट्रांसफॉर्मर पानी की चपेट में आने से कई इलाकों की बत्ती गुल हो गई है, जिससे राहत कार्य में भी दिक्कतें आ रही हैं।
ग्रामीण इलाकों की बात करें तो कोठी क्षेत्र में पानी के तेज बहाव के कारण एक कच्चा मकान गिर गया, जिसके मलबे में दबने से 4 मवेशी फंस गए और 2 की मौत हो गई।
पन्ना जिले में कई गांव चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो चुके हैं।
स्थिति को देखते हुए बानसुजारा बांध के 8 गेट खोल दिए गए हैं, जिनसे धसान नदी में 792 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी छोड़ा जा रहा है।
NDRF और SDRF की टीमें रेस्क्यू में जुटीं
राहत और बचाव कार्यों को गति देने के लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।
बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चित्रकूट, पिंडरा और सतना में SDRF की 3 टीमें पहले से ही तैनात कर दी गई हैं।
बिगड़ते हालात को देखते हुए रीवा से SDRF की 2 अतिरिक्त टीमें बुलाई गई हैं।
इसके अलावा, सतना कलेक्टर ने आपात स्थिति से निपटने के लिए NDRF की 3 टीमों को भी तैनात करने के निर्देश दिए हैं।
सतना जिले के कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है।
प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों, उफनती नदियों और जलाशयों से दूर रहने की हिदायत दी है।
साथ ही, पानी से भरे पुल या पुलिया को पार न करने की सख्त सलाह दी गई है।
मौसम विभाग का अनुमान और बारिश का आंकड़ा
मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के अनुसार, प्रदेश के ऊपर एक लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ सक्रिय है।
हालांकि, इसका असर पूरे मध्यप्रदेश में एक समान नहीं है।
आगामी दिनों में प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
रीवा, सीधी, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, सिवनी और बालाघाट समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
आंकड़ों की बात करें तो मध्यप्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन 26.9 इंच (683.9 मिमी) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि सामान्य बारिश (29.5 इंच) से लगभग 9 प्रतिशत कम है।
पूर्वी मध्यप्रदेश में औसत से 6% और पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश हुई है, लेकिन कम समय में अत्यधिक बारिश होने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है।
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