MP Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र (पर्चा) चुनाव अधिकारियों द्वारा खारिज कर दिया गया है।
इस फैसले के बाद से ही सूबे से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ गया है।
कांग्रेस ने इस पूरी कार्रवाई को “लोकतंत्र की हत्या” और “सीट की चोरी” करार दिया है।
मामला इतना बढ़ चुका है कि इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस का एक बड़ा 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को दोपहर 12 बजे दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने पहुंच रहा है।

इस दल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, सचिन पायलट, रणदीप सुरजेवाला और भूपेश बघेल जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं।
इससे पहले मंगलवार को जैसे ही नामांकन रद्द होने की खबर आई, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं ने दिल्ली और भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर जमकर धरना-प्रदर्शन किया था।

दिल्ली में जब नेताओं को अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली, तो वे मुख्य गेट पर ही धरने पर बैठ गए, जिसके बाद पुलिस को दखल देना पड़ा।

रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे में ‘4 घंटे की गहमागहमी’
यह पूरा विवाद मंगलवार (9 जून) को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) के दौरान शुरू हुआ।
विधानसभा में दोपहर 2 बजे रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के कमरे में स्क्रूटनी की प्रक्रिया शुरू हुई। शुरुआत बेहद सामान्य रही।
सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों के कागजातों की जांच की गई। उनमें कोई कमी नहीं मिली और विपक्ष की तरफ से भी कोई आपत्ति नहीं जताई गई।
लेकिन जैसे ही मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म की बारी आई, भाजपा नेताओं ने एक लिखित शिकायत दर्ज करा दी।

इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि मीनाक्षी ने अपने हलफनामे (Affidavit) में तेलंगाना के एक अदालती मामले की जानकारी छिपाई है।
आपत्ति दर्ज होते ही कमरे में खलबली मच गई। उस वक्त मीनाक्षी के साथ मौजूद कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया ने तुरंत मोर्चा संभाला, जबकि मीनाक्षी ने बाहर आकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को फोन घनघनाए।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच दो दौर की लंबी बहस हुई। कांग्रेस नेता चाहते थे कि फैसला अगले दिन आए ताकि वे तैयारी कर सकें, लेकिन भाजपा नेता उसी दिन फैसले पर अड़े रहे।
आखिरकार, शाम 5:30 बजे दोबारा बहस हुई और सारे कानूनी पहलुओं को देखने के बाद शाम 6:30 बजे रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी का नामांकन निरस्त करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया।

आखिर किन 6 आपत्तियों पर रद्द हुआ नामांकन?
भाजपा नेताओं (रजनीश अग्रवाल, महेश केवट और राहुल कोठारी) की तरफ से मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर मुख्य रूप से 6 आपत्तियां उठाई गई थीं:
- अस्पष्ट मोहर: नामांकन पत्र के पेज नंबर 5, 6 और 7 पर जो सत्यापन की मोहर लगी थी, वह साफ नहीं दिख रही थी। इससे उसकी वैधता पर सवाल खड़े हुए।
- अधूरा कॉलम: हलफनामे में आपराधिक मामलों से जुड़े एक जरूरी कॉलम को खाली या अधूरा छोड़ दिया गया था।
- फॉर्मेट में बदलाव: आयोग द्वारा तय किए गए आय विवरण (Income Details) के तय प्रारूप (Format) के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा।
- संपत्ति में अंतर: मुख्य नामांकन पत्र और शपथ पत्र में दिखाई गई कुल संपत्ति के आंकड़ों में विसंगति (अंतर) पाई गई।
- जानकारी छिपाना: फॉर्म-26 में एक लंबित मामले की जानकारी नहीं देने का आरोप लगा।
- गलत जानकारी: इन्हीं सब कमियों को आधार बनाकर फॉर्म को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की गई थी।

10 पॉइंट में समझिए क्या है असली कानूनी पेच?
1. कोई एफआईआर नहीं: भाजपा ने जिस मामले को लेकर आपत्ति जताई है, उसमें मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई सीधी एफआईआर दर्ज नहीं है।
2. मामले की पृष्ठभूमि: यह विवाद साल 2022 का है। तेलंगाना की एक महिला ने कांग्रेस नेता कुंभम शिवा कुमार रेड्डी पर छेड़छाड़ और डराने-धमकाने का आरोप लगाया था।
3. पार्टी पर आरोप: महिला का कहना था कि शिकायत के बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने शिवा कुमार रेड्डी पर कोई सख्त एक्शन नहीं लिया।
4. मीनाक्षी का नाम कैसे आया?: महिला के मुताबिक, उसने उस वक्त की तेलंगाना कांग्रेस प्रभारी मीनाक्षी नटराजन से भी इस बात की लिखित शिकायत की थी।
5. अनुशासन का मुद्दा: आरोप है कि पार्टी के संविधान में नियम होने के बावजूद आरोपी नेता पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
6. भाजपा का तर्क: भाजपा का कहना है कि चूंकि अदालत में चल रही याचिका में मीनाक्षी नटराजन का नाम शामिल है, इसलिए नियम के मुताबिक उन्हें अपने चुनाव हलफनामे में इसका जिक्र करना ही चाहिए था।
7. कांग्रेस का दावा: कांग्रेस का साफ कहना है कि जब मीनाक्षी के खिलाफ कोई आपराधिक केस या एफआईआर है ही नहीं, तो हलफनामे में लिखने का कोई कानूनी मतलब नहीं बनता।
8. न्याय न मिलने की बात: शिकायतकर्ता महिला का आरोप था कि राजनीतिक रसूख के कारण उसकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।
9. अधिकारी का फैसला: आखिरी फैसला रिटर्निंग ऑफिसर को करना था कि क्या यह जानकारी छिपाना नियमों का उल्लंघन है या नहीं, और उन्होंने इसे उल्लंघन माना।
10. दोष सिद्ध नहीं: कानूनी तौर पर मीनाक्षी के खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ है, लेकिन तकनीकी खामी और जानकारी छिपाने के आधार पर उनका पर्चा खारिज हो गया।

आगे क्या करेगी कांग्रेस?
कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को एक सोची-समझी ‘राजनीतिक साजिश’ बता रही है।
पार्टी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग पूरी तरह से भाजपा के दबाव में काम कर रहा है।
कांग्रेस का तर्क है कि जिस शिकायत को आधार बनाया गया है, उस पर अभी तक अदालत ने संज्ञान (Cognizance) भी नहीं लिया है।
ऐसे में नामांकन रद्द करना पूरी तरह गलत है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वे इस फैसले के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
