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आस्था का अमृत महोत्सव: 75 साल बाद सोमनाथ का पहला ‘कुंभाभिषेक’, PM मोदी ने 11 तीर्थों के जल से किया अभिषेक

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Somnath Amrit Mahotsav: 11 मई 2026 को भारत के गौरव और प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के पुनर्निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा को पूरे 75 वर्ष हो गए हैं।

इस खास अवसर को सोमनाथ अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

रोड शो और जोरदार स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार रात जामनगर पहुंचे थे, जहां से वे आज सोमनाथ पहुंचे।

मंदिर पहुंचने से पहले पीएम मोदी ने हेलीपैड से मंदिर तक लगभग 2 किलोमीटर लंबा एक भव्य रोड शो किया।

सड़कों के दोनों ओर जनसैलाब उमड़ा था, जो ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा।

पीएम ने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन स्वीकार किया और फिर मंदिर परिसर में प्रवेश किया।

इतिहास में पहली बार: शिखर का कुंभाभिषेक

सोमनाथ मंदिर के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब इसके 90 मीटर ऊंचे भव्य शिखर का ‘कुंभाभिषेक’ किया गया।

कुंभाभिषेक एक प्राचीन दक्षिण भारतीय परंपरा है, जिसमें मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनर्जीवित करने के लिए पवित्र कलशों और मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया जाता है।

इस अनुष्ठान की खासियत यह रही कि इसमें देश के 11 पवित्र तीर्थस्थलों से लाए गए जल का उपयोग किया गया।

क्रेन की मदद से ऊंचे शिखर तक पहुंचकर वैदिक मंत्रों के बीच जल और औषधियों से अभिषेक किया गया।

पीएम मोदी खुद इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

1000 साल का दर्द और 75 साल का गौरव

वर्ष 2026 सोमनाथ के लिए दो विरोधाभासी स्मृतियों का संगम है।

एक ओर, आज से ठीक 1000 साल पहले सन् 1026 में आक्रांता महमूद गजनवी ने इस मंदिर को तहस-नहस किया था।

वहीं दूसरी ओर, आज से 75 साल पहले 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से बने इस नए मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की थी।

आज का उत्सव उसी पुनर्निर्माण की सफलता और भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का प्रतीक है।

आसमान में सूर्यकिरण का शौर्य

अभिषेक की रस्म पूरी होने के बाद, भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम’ ने सोमनाथ के आसमान में अपनी कलाबाजी दिखाई।

करीब 15 मिनट तक चले इस एयर शो ने श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।

इतना ही नहीं, ‘चेतक’ हेलीकॉप्टरों के जरिए मंदिर के शिखर पर पुष्प वर्षा की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और अलौकिक हो गया।

पीएम मोदी का विजन और कार्यक्रम

प्रधानमंत्री ने मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित किया।

सोमनाथ में दर्शन के बाद वे गिर सोमनाथ और वडोदरा में कई अन्य विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

मंदिर परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

सोमनाथ का यह अमृत पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह भारत की अटूट आस्था और बार-बार उठ खड़े होने की शक्ति का प्रमाण है।

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