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AAP को बड़ा झटका! राघव चड्ढा ने 7 राज्यसभा सांसदों के साथ छोड़ी आम आदमी पार्टी, जल्द होंगे BJP में शामिल

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Raghav Chadha joins BJP: पिछले कुछ समय से चल रही खींचतान के बीच आप नेता राघव चड्ढा ने आखिरकार आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने का ऐलान कर दिया है।

यह केवल एक इस्तीफा नहीं था, बल्कि AAP के लिए एक बड़ी ‘पॉलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक’ है।

राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे दिग्गजों ने भी भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है।

संविधान के रास्ते ‘विलय’ की तैयारी

24 अप्रैल, शुक्रवार को राघव चड्ढा ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ किया कि यह दलबदल नहीं, बल्कि ‘विलय’ है।

उन्होंने भारतीय संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें से 7 (दो-तिहाई) उनके साथ हैं।

जब किसी पार्टी के दो-तिहाई जनप्रतिनिधि एक साथ अलग होते हैं, तो उन पर दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता।

चड्ढा के साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजेंद्र गुप्ता जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

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“जवानी के 15 साल दिए, बदले में मिला समझौता”

भावुक होते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है।

उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट था, जो भ्रष्टाचार मिटाने के सपने के साथ राजनीति में आया था। लेकिन आज बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि पार्टी अब भ्रष्ट लोगों के हाथों में है।”

उन्होंने खुद को ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ करार दिया।

कैसे शुरू हुई कहानी?

इस बगावत की नींव तब पड़ी जब हाल ही में AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया था।

पार्टी का आरोप था कि चड्ढा राष्ट्रीय मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी को घेरने के बजाय ‘समोसे के रेट’ जैसे छोटे मुद्दे उठा रहे हैं।

वहीं, राघव का कहना है कि उन्हें संसद में बोलने से रोका गया और उनकी खामोशी को कमजोरी समझा गया।

जब अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, तब राघव चड्ढा लंदन में अपनी आंखों का ऑपरेशन करा रहे थे, जिसे लेकर पार्टी के भीतर काफी बयानबाजी हुई थी।

AAP के लिए भविष्य की चुनौती

संदीप पाठक, जिन्हें AAP का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था, उनका जाना पार्टी के लिए सबसे बड़ा तकनीकी घाटा है।

वहीं हरभजन सिंह और अशोक मित्तल जैसे चेहरों के हटने से पंजाब में पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है।

राघव चड्ढा ने संकेत दिए हैं कि अभी कई और विधायक और नेता उनके संपर्क में हैं जो शाम तक भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं।

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