Sagar Liquor Tragedy: मध्य प्रदेश के सागर जिले से जुड़े चर्चित बंडा शराबकांड के मुख्य आरोपियों पर पुलिस का शिकंजा कस गया है।
पुलिस ने तड़के हुई एक मुठभेड़ (शॉर्ट एनकाउंटर) के बाद मामले के मुख्य आरोपी मनीष लोधी और उसके साथी आशीष साहू को दबोच लिया।
दोनों आरोपियों पर पुलिस महानिरीक्षक (IG) की ओर से 30-30 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
इस कार्रवाई के साथ ही पुलिस ने मामले में अब तक 35 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जबकि इस पूरे जहरीले नेटवर्क में कुल 52 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

तड़के 3 बजे घाटी पर घेराबंदी, पुलिस टीम पर की फायरिंग
सागर के पुलिस अधीक्षक (SP) अनुराग सुजानिया ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि 6 सितंबर को हुए शराबकांड के बाद से मुख्य आरोपी मनीष लोधी लगातार फरार चल रहा था।
बुधवार तड़के करीब 3 बजे मालथौन थाना प्रभारी को मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि मनीष अपने ससुराल मड़ावरा (ललितपुर, उत्तर प्रदेश) से किसी करीबी की मदद लेने सागर क्षेत्र की तरफ आ रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मालथौन थाना क्षेत्र के अंतर्गत नोनिया-सेसई रोड घाटी पर तुरंत नाकेबंदी कर दी। जब संदिग्ध वाहन वहां पहुंचा, तो पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया।
हालांकि, खुद को घिरा देख मनीष लोधी और उसके साथी आशीष साहू ने सरेंडर करने के बजाय सीधे पुलिस टीम पर गोलियां चलाना शुरू कर दिया।

पुलिस टीम ने आरोपियों को चेतावनी दी, लेकिन जब उनकी ओर से गोलीबारी बंद नहीं हुई, तो पुलिस को आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग करनी पड़ी।
इस दौरान एक गोली मनीष लोधी के पैर में लगी, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़ा।
वहीं उसका साथी आशीष साहू अंधेरे का फायदा उठाकर भागने की कोशिश कर रहा था, जो भागते समय गिरकर घायल हो गया।
मुठभेड़ के दौरान आरोपियों की गोलियों से पुलिस की गाड़ी के शीशे टूट गए, लेकिन सतर्कता के कारण किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई।
पुलिस ने मौके से दो देसी कट्टे, पांच राउंड कारतूस और एक बेसबॉल का डंडा बरामद किया है।
दोनों घायल आरोपियों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है, जहां उनका डॉक्टरी परीक्षण और इलाज जारी है।
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आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने के लिए बदला नाम, खुद को बताया भाई
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी मनीष लोधी का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है।
उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में आबकारी कानून और अन्य धाराओं के तहत 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

नियमों के मुताबिक, आपराधिक रिकॉर्ड होने पर शराब दुकान का लाइसेंस नहीं मिल सकता था।
इस नियम से बचने के लिए आरोपी ने एक बड़ी धोखाधड़ी की।
उसने अपना नाम बदलकर ‘यशवंत सिंह ठाकुर’ रख लिया और कागजों में यशवंत को अपना भाई बताया, जबकि असलियत में यशवंत कोई और नहीं बल्कि वह खुद ही था।
इसी फर्जी पहचान के दम पर उसने बरेठी स्थित शराब दुकान का सरकारी ठेका हासिल कर लिया।
जब यह पूरा मामला उजागर हुआ, तो आबकारी विभाग ने ठेका निरस्त करते हुए मनीष के खिलाफ धोखाधड़ी का अलग से मामला दर्ज कराया है।

कैसे रचा गया जहरीली शराब का पूरा नेटवर्क?
पुलिस जांच में पता चला है कि सरकारी लाइसेंस की आड़ में आरोपी अवैध और जहरीली शराब का समानांतर कारोबार चला रहे थे।
इस नेटवर्क में हर व्यक्ति का काम बंटा हुआ था:
* रवि लखेरा (शराब बनाने का मास्टरमाइंड): छतरपुर के महोबा का रहने वाला और वर्तमान में ललितपुर (यूपी) की गंगापुरम कॉलोनी में रहने वाला रवि लखेरा एक अंतरराज्यीय शराब तस्कर है।
उसके खिलाफ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में करीब 25 मामले दर्ज हैं।
रवि को केमिकल मिलाकर नकली शराब तैयार करने की अच्छी समझ है। उसने ही मनीष लोधी को नकली शराब बनाने का तरीका सिखाया था।

* मनीष लोधी और आशीष साहू (नेटवर्क और ठेका): मनीष ने रवि से तरीका सीखने के बाद बरेठी शराब दुकान की आड़ में नकली शराब बेचना शुरू किया।
बंडा में सागर रोड पर उसका एक बार भी था, जिसे पुलिस ने सील कर दिया है।
आशीष साहू शराब दुकान के संचालन के साथ-साथ गांवों में अवैध शराब की सप्लाई में मनीष का हाथ बंटाता था।
* चंद्रभान उर्फ चंदू (स्थानीय मास्टरमाइंड): ततरवारा गांव का रहने वाला चंदू इस नेटवर्क की स्थानीय कमान संभालता था। उसी के मक्के के खेत में छिपकर नकली शराब तैयार की जाती थी। चंदू पर पहले से 5 अपराध दर्ज हैं।
* शिवांजय राजपूत (सप्लाई चेन की मुख्य कड़ी): छापरी गांव का रहने वाला शिवांजय, चंदू का रिश्तेदार है। शराब बनकर तैयार होने के बाद उसे आसपास के ग्रामीण इलाकों में पहुंचाने की जिम्मेदारी शिवांजय की ही थी।

मक्के के खेत में बनी ‘सागर गोल्ड’
पुलिस की तफ्तीश में यह बात साफ हुई है कि 2 सितंबर को ततरवारा गांव में चंद्रभान उर्फ चंदू के मक्के के खेत के बीच में अवैध शराब बनाने का सेटअप लगाया गया था।
इसके लिए कच्चा माल और केमिकल रवि लखेरा और मनीष लोधी ने मुहैया कराया था।
इसके बाद चंदू, शिवांजय और मनीष ने मिलकर करीब 50 पेटी नकली शराब तैयार की।
इस शराब को बोतलों में भरकर उस पर ‘सागर गोल्ड’ नाम का फर्जी ब्रांड लेबल लगाया गया और फिर शिवांजय के जरिए आसपास के गांवों में बांट दिया गया।
इसी जहरीली शराब को पीने से कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई, जबकि रामसिंह और दिनेश शिवहरे नाम के दो आरोपियों की मौत भी हो चुकी है।

वित्तीय एंगल और बैंक खातों की गहन जांच
मामले में सामने आ रहे वित्तीय लेनदेन को लेकर सागर एसपी अनुराग सुजानिया ने बताया कि पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है।
घटना के तार बैंक चेक और सेल्फ-चेक ट्रांजैक्शन से भी जुड़ रहे हैं।
पुलिस ने संबंधित बैंक अधिकारियों से पत्राचार कर विस्तृत जानकारी मांगी है।
यह पता लगाया जा रहा है कि जिन खातों से लेन-देन हुआ, वे चेक आरोपी के व्यक्तिगत खाते के थे या किसी जॉइंट अकाउंट के।
बैंक से रिकॉर्ड और आंकड़े मिलते ही वित्तीय धोखाधड़ी के एंगल पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब तक की कार्रवाई का ब्योरा
* कुल आरोपी: 52 लोग चिन्हित
* हिरासत/गिरफ्तारी: 39 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में (35 को जेल/रिमांड पर भेजा गया)
* फरार आरोपी: 11 की तलाश जारी
* मृतक आरोपी: 2 (जहरीली शराब पीने से मौत)
* बरामदगी: 2 देसी कट्टे, 5 कारतूस, बेसबॉल डंडा और अवैध शराब का जखीरा
पुलिस प्रशासन का कहना है कि फरार चल रहे बाकी 11 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही पूरा नेटवर्क खत्म कर दिया जाएगा।
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