Supreme court cancels Student FIR: सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और आंदोलनकारियों को बहुत बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर आंदोलन और नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सभी 13 एफआईआर (FIR) को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए इन विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ अब कोई नई FIR भी दर्ज नहीं की जाएगी।

3 महीने में मुआवजा देने का सख्त निर्देश
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली पीठ ने केंद्र सरकार को एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया।
कोर्ट ने आदेश दिया कि नीट परीक्षा विवाद और आंदोलन के तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर उचित मुआवजा दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला छात्रों और युवाओं के हक में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

संविधान के अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल
यह पूरा मामला तब कोर्ट पहुंचा जब दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR को वापस लेने की मांग की।
भारत के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस 25 जुलाई को हुए समझौते के अनुसार इन मुकदमों को आगे नहीं चलाना चाहती हैं।
अदालत ने मामले की गंभीरता और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत मिली विशेषाधिकार शक्तियों का इस्तेमाल किया।
इस अनुच्छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट को ‘पूर्ण न्याय’ (Complete Justice) प्रदान करने के लिए विशेष आदेश देने का अधिकार होता है।

कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह फैसला केवल इसी विशेष मामले की परिस्थितियों के आधार पर लिया गया है और इसे भविष्य के अन्य मामलों में नजीर (उदाहरण) के रूप में पेश नहीं किया जा सकेगा।
2800 से ज्यादा लोगों पर नई FIR की मांग खारिज
दिल्ली पुलिस ने अपनी अर्जी में यह भी दावा किया था कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई के हिंसक प्रदर्शन के दौरान भीड़ में 2,873 ऐसे लोग मौजूद थे, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
पुलिस ने अदालत से मांग की थी कि इन चुनिंदा 2,873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन से जुड़ी परिस्थितियों का संज्ञान लेते हुए नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति नहीं दी और मामले को पूरी तरह से समाप्त कर दिया।

CJP ने वापस लिया 5 सितंबर का मार्च
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ठीक पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना ‘दिल्ली मार्च’ वापस लेने की आधिकारिक घोषणा की।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता सौरव ने बताया कि केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है और उन्हें पूरा करने का लिखित और मौखिक आश्वासन दिया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कोर्ट को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार छात्रों से किए गए तीनों प्रमुख वादों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

क्या था पूरा जंतर-मंतर आंदोलन?
इस पूरे विवाद की शुरुआत नीट (NEET) पेपर लीक की घटनाओं के बाद हुई थी।
छात्रों और युवाओं के अधिकार के लिए गठित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना शुरू हुआ था।
20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर बढ़ने लगे, तब सुरक्षाकर्मियों और आंदोलनकारियों के बीच भारी झड़प हो गई थी।
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया था।
इस घटना के बाद आंदोलन पूरे देश के प्रमुख शहरों में फैल गया था।

छात्रों की मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की थी।
25 जुलाई को सरकार द्वारा मांगें मान लिए जाने और शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफे के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी एफआईआर रद्द कर दिए जाने से महीनों से कानूनी उलझन का सामना कर रहे हजारों छात्रों ने राहत की सांस ली है।
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