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जग्गी हत्याकांड: जेल जाने से बचे अमित जोगी, सुप्रीम कोर्ट ने CBI को दिया नोटिस

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Amit Jogi Supreme Court Stay: छत्तीसगढ़ की राजनीति को दो दशकों से हिला देने वाले चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक नया और बड़ा कानूनी मोड़ आया है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के बेटे और जेसीसीजे (JCCJ) के सुप्रीमो अमित जोगी को देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

कोर्ट ने बिलासपुर हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए सरेंडर करने के निर्देश दिए गए थे।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला साल 2003 का है, जब एनसीपी (NCP) नेता रामावतार जग्गी की सरेराह हत्या कर दी गई थी।

इस हत्याकांड ने उस वक्त की जोगी सरकार की जड़ें हिला दी थीं।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, हाल ही में बिलासपुर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी समेत अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने अमित जोगी को सख्त निर्देश दिए थे कि उन्हें 23 अप्रैल तक हर हाल में कोर्ट के सामने सरेंडर करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सरेंडर की डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

गुरुवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

अमित जोगी की ओर से देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की।

सिब्बल ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने उनका पक्ष पूरी तरह सुने बिना ही एकतरफा फैसला सुना दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद अमित जोगी को अंतरिम राहत प्रदान की।

अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि:

1. हाईकोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा और सरेंडर के आदेश पर फिलहाल रोक (Stay) लगाई जाती है।

 2. अमित जोगी को फिलहाल जेल जाने या सरेंडर करने की कोई जरूरत नहीं है।

 3. कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है।

सियासी और कानूनी मायने

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अमित जोगी के लिए किसी  वरदान से कम नहीं है।

अगर आज कोर्ट से राहत नहीं मिलती, तो अमित जोगी को सलाखों के पीछे जाना पड़ता, जिससे उनकी राजनीतिक सक्रियता पर बड़ा असर पड़ता।

हाईकोर्ट ने उन्हें दो मुख्य आधारों पर सजा सुनाई थी: पहला, सीबीआई की अपील को स्वीकार करना और दूसरा, उन्हें हत्या की साजिश में शामिल मानकर उम्रकैद देना।

अब अमित जोगी ने इन दोनों ही बिंदुओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

फिलहाल, गेंद अब सीबीआई के पाले में है।

सीबीआई को अब सुप्रीम कोर्ट में यह साबित करना होगा कि हाईकोर्ट का फैसला क्यों सही था, वहीं जोगी की लीगल टीम यह साबित करने की कोशिश करेगी कि हाईकोर्ट के फैसले में कानूनी खामियां थीं।

अमित जोगी के लिए यह जीत केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक भी है।

छत्तीसगढ़ में इस मामले को लेकर हमेशा से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के इस स्टे के बाद अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

फिलहाल के लिए, अमित जोगी खुले आसमान के नीचे अपनी कानूनी लड़ाई जारी रख सकेंगे।

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