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मां के प्यार को तरसा नन्हा ‘पंच’, खिलौने को बनाया सहारा; अब गोद लेने के लिए करोड़ों देने को तैयार लोग

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Japan Baby Monkey Punch: इंटरनेट की दुनिया में इस वक्त एक छोटे से मासूम चेहरे ने तहलका मचा रखा है।

यह कोई फिल्मी सितारा या बड़ा खिलाड़ी नहीं, बल्कि जापान के ‘इचिकावा सिटी जू’ (Ichikawa City Zoo) का एक नन्हा मकाक बंदर है, जिसका नाम है— पंच कुन।

पंच की मासूमियत और उसकी भावुक कहानी ने दुनिया भर के लाखों लोगों के दिलों को छू लिया हैं।

जिसके बाद अब लोग उसके गोद लेने के लिए करोड़ रुपये देने के लिए भी तैयार है।

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आइए जानते हैं नन्हें पंच की इमोशनल कहानी…

2 करोड़ रुपये की पेशकश और विवाद

पंच की लोकप्रियता इस कदर बढ़ी कि अब उसे खरीदने की डिमांड शुरू हो गई है।

मशहूर और अक्सर विवादों में रहने वाले ब्रिटिश-अमेरिकन इंफ्लुएंसर ट्रिस्टन टेट ने पंच को खरीदने की इच्छा जताई है।

ट्रिस्टन ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि वह और उनके भाई कोब्रा टेट (एंड्रयू टेट) इस बंदर के लिए 2,50,000 डॉलर (लगभग 2 करोड़ रुपये) देने को तैयार हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कोई मजाक नहीं कर रहे हैं।

हालांकि, वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों ने इस तरह के प्रस्तावों का विरोध किया है, क्योंकि जंगली जानवरों को पालतू बनाना या उनकी नुमाइश करना उनके प्राकृतिक विकास के खिलाफ है।

खिलौने में ढूंढा मां का प्यार

पंच की कहानी जितनी भावुक है, उतनी ही प्रेरणादायक भी।

जुलाई 2025 में पैदा हुए इस नन्हे बंदर को उसकी मां ने जन्म के महज कुछ समय बाद ही छोड़ दिया था।

चिड़ियाघर के विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर पहली बार मां बनने वाली मादा बंदरें घबराहट या अनुभव की कमी के कारण अपने बच्चों को छोड़ देती हैं।

मां से बिछड़ने के बाद पंच पूरी तरह अकेला हो गया था।

उसका अकेलापन दूर करने के लिए चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने उसे एक ‘स्टफ्ड ओरंगुटान’ (सॉफ्ट टॉय) दिया।

लोगों ने कहा- “तुम अकेले नहीं हो”

पंच ने उस बेजान खिलौने को ही अपनी दुनिया मान लिया।

वह घंटों उस खिलौने से चिपका रहता, उसे गले लगाकर सोता और डर लगने पर उसे मजबूती से पकड़ लेता।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पंच को इस खिलौने के साथ देखकर लोगों का दिल पसीज गया।

इंटरनेट पर लोग इसे ‘हीलिंग’ वीडियो कह रहे हैं और पंच को दिलासा देते हुए लिख रहे हैं— “तुम अकेले नहीं हो।”

अकेलेपन से परिवार तक का सफर

पंच के लिए यह सफर आसान नहीं था।

जब उसे चिड़ियाघर में दूसरे बंदरों की टोली (Troop) के साथ मिलाने की कोशिश की गई, तो उसे शुरुआत में काफी नफरत झेलनी पड़ी।

अन्य मादा बंदरों को लगता था कि पंच उनके बच्चों के लिए खतरा है, इसलिए वे उसे डराकर भगा देती थीं।

लेकिन चिड़ियाघर के स्टाफ ने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे पंच ने अपनी जगह बनाई और अब खबर आ रही है कि उसे उसके परिवार ने स्वीकार कर लिया है।

अब उसे उस खिलौने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसे अपनों की गर्माहट मिलने लगी है।

पंच की यह कहानी हमें सिखाती है कि प्यार और सुरक्षा की जरूरत सिर्फ इंसानों को नहीं, बल्कि जानवरों को भी होती है।

जहां एक ओर लोग उसे करोड़ों में खरीदने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसकी असली खुशी उसके अपने कुनबे में ही है।

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