Jabalpur Cruise Accident: मध्य प्रदेश के जबलपुर के मशहूर पर्यटन स्थल बरगी डैम में गुरुवार, 30 अप्रैल की शाम एक बड़ा हादसा हो गया।
तेज आंधी और तूफान की वजह से पर्यटकों से भरा एक क्रूज पानी में पलट गया।
इस दर्दनाक हादसे में अब तक 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं।
प्रशासन और बचाव दल की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं।

कैसे हुआ हादसा?
घटना गुरुवार शाम करीब 5 बजे की है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग का एक क्रूज पर्यटकों को लेकर डैम की सैर पर निकला था।
चश्मदीदों और क्रूज के पायलट के मुताबिक, अचानक मौसम बदला और एक भीषण चक्रवात (तूफान) उठा।
लहरें इतनी तेज थीं कि 10 साल का अनुभव रखने वाले पायलट को भी संभलने का मौका नहीं मिला।

क्रूज अनियंत्रित होकर किनारे से लगभग 300 मीटर दूर गहरे पानी में समा गया।
ममता की वो तस्वीर, जिसने सबकी आंखें नम कर दीं
इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर दिल्ली के मैसी परिवार की है।
मरिना मैसी और उनका 4 साल का बेटा त्रिशान इस हादसे का शिकार हो गए।
जब बचाव दल ने मरिना का शव निकाला, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई।

मरिना ने अपनी लाइफ जैकेट के अंदर अपने मासूम बेटे को मजबूती से सीने से चिपका रखा था।
मौत के खौफनाक मंजर में भी एक मां ने अपने बच्चे को बचाने की आखिरी कोशिश की थी।
रेस्क्यू टीम ने बताया कि दोनों के शव एक-दूसरे को बाहों में जकड़े हुए मिले।
इस परिवार के पिता प्रदीप मैसी और बेटी सिया किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे, लेकिन उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने परिवार को उजड़ते देखा।

क्षमता से ज्यादा सवार थे लोग?
जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है।
पर्यटन विभाग के अनुसार, क्रूज की क्षमता 60 लोगों की थी, लेकिन हादसे के वक्त इसमें लगभग 43 से 47 लोग सवार थे।
हैरान करने वाली बात यह है कि टिकट केवल 29 लोगों की ही काटी गई थी।
बाकी लोग क्रूज पर कैसे पहुंचे, यह विभाग की लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े करता है।

वहीं, पर्यटन विभाग के अधिकारी योगेंद्र रिछारिया ने बताया कि यह क्रूज साल 2006 में बना था, यानी यह लगभग 20 साल पुराना था।
रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही SDRF और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची।
अंधेरा और खराब मौसम होने के कारण शुरुआत में बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आईं।

शुक्रवार सुबह से ही NDRF, सेना (Army) और विशेष गोताखोरों की टीमें मोर्चा संभाले हुए हैं।
हैदराबाद से एक स्पेशल टीम और हेलिकॉप्टर मंगाया गया है, वहीं कोलकाता से पैरामिलिट्री की एक विशेष टीम भी जबलपुर पहुंच चुकी है।
20 फीट गहरे पानी में फंसे क्रूज को निकालने के लिए बड़ी हाइड्रॉलिक मशीनों और पोकलेन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

CM मोहन यादव और PM मोदी ने जताया दुख
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
उन्होंने भोपाल में बयान जारी करते हुए कहा कि घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और वे खुद स्थिति का जायजा लेने जबलपुर पहुंच सकते हैं।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

लापरवाही और विरोधाभासी बयान
एक तरफ जहां पूरा प्रदेश शोक में है, वहीं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है।
जब उनसे क्रूज के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि “नर्मदा में पेट्रोल-डीजल बोट पर रोक है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।”

यह बयान इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि जिस क्रूज के साथ हादसा हुआ, वह पर्यटन विभाग का ही था।
हादसे में सुरक्षित लोगों की सूची…

मृतकों और लापता लोगों की सूची
अब तक मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं।
जबलपुर, भोपाल, दिल्ली और तमिलनाडु के पर्यटक इस हादसे का शिकार हुए हैं।
मृतक: नीतू सोनी, सौभाग्यम अलागन, मधुर मैसी, काकुलाझी, रेशमा सैयद, शमीम नकवी, मरीना मैसी, त्रिशान और ज्योति सेन।

लापता: 5 साल का श्रीतमिल, 6 साल का विराज सोनी, 9 साल का मयूरम और कामराज आर्य अभी भी लापता हैं।

यह हादसा एक बड़ी चेतावनी है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है।
क्या पुराने हो चुके क्रूज का मेंटेनेंस सही था?
क्या लाइफ जैकेट और सुरक्षा उपकरण पर्याप्त थे?
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
