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तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: थलापति विजय की TVK का ‘इस्तीफा कार्ड’, क्या DMK-AIADMK मिलाएंगे हाथ?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Thalapathy Vijay TVK Crisis: तमिलनाडु की सियासत इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर पल समीकरण बदल रहे हैं।

सुपरस्टार थलापति विजय की नई नवेली पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी है, लेकिन सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता कांटों भरा साबित हो रहा है।

शुक्रवार सुबह चेन्नई की सड़कों पर जो मंजर दिखा, उसने साफ कर दिया कि यह लड़ाई अब सिर्फ विधानसभा की नहीं, बल्कि सड़क और जनसमर्थन की भी बन चुकी है।

राज्यपाल का फैसला और TVK की नाराजगी

विवाद की जड़ में राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर का वह फैसला है, जिसमें उन्होंने विजय के सरकार बनाने के दावे को दूसरी बार खारिज कर दिया।

राज्यपाल ने शर्त रखी है कि विजय को 118 विधायकों (बहुमत का आंकड़ा) के भौतिक हस्ताक्षर लेकर आने होंगे। इस फैसले ने TVK खेमे में खलबली मचा दी है।

पार्टी के समर्थकों ने शुक्रवार सुबह राजभवन (लोकभवन) के बाहर जमकर नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

इस्तीफे की धमकी और द्रविड़ पार्टियों का गठबंधन

तमिलनाडु की राजनीति में जो कभी सोचा नहीं गया था, आज उसकी चर्चा जोरों पर है—DMK और AIADMK का संभावित गठबंधन।

TVK को शक है कि ये दोनों धुर विरोधी दल सिर्फ उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हाथ मिला सकते हैं।

इस पर TVK ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि अगर ये दोनों द्रविड़ पार्टियां अनैतिक तरीके से सरकार बनाने का दावा पेश करती हैं, तो TVK के सभी नवनिर्वाचित विधायक सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देंगे।

पार्टी का तर्क है कि वे उस सरकार का हिस्सा या दर्शक नहीं बनेंगे जो जनता के जनादेश का अपमान करके बनाई गई हो।

कांग्रेस का ‘हाथ’ विजय के साथ

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा उलटफेर कांग्रेस के रुख में आया है।

कांग्रेस ने अपने पुराने साथी DMK का साथ छोड़कर TVK को समर्थन देने का ऐलान किया है।

कांग्रेस का आरोप है कि राज्यपाल केंद्र के इशारे पर सबसे बड़ी पार्टी को मौका नहीं दे रहे हैं।

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने भी इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि बहुमत का परीक्षण राजभवन में नहीं, बल्कि विधानसभा के पटल पर होना चाहिए।

उन्होंने पुराने उदाहरण देते हुए पूछा कि आखिर विजय से ही हस्ताक्षर क्यों मांगे जा रहे हैं?

रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की वापसी

तमिलनाडु की राजनीति में ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ एक बार फिर लौट आई है।

खबर है कि AIADMK के 28 विधायक पुडुचेरी के एक लग्जरी रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिए गए हैं।

ये विधायक पूर्व मंत्री सीवी शनमुगम के करीबी बताए जा रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो विजय को बहुमत के लिए मात्र 6 और विधायकों की जरूरत है और वे AIADMK के बागी गुट के संपर्क में हैं।

चर्चा यह भी है कि बागी गुट को उपमुख्यमंत्री पद का ऑफर दिया गया है।

DMK और AIADMK का रुख

DMK ने अपनी बैठक में कांग्रेस पर ‘धोखेबाजी’ का आरोप लगाया है।

पार्टी का कहना है कि जिसे उन्होंने सीटें और सम्मान दिया, वही वक्त आने पर साथ छोड़ गया।

वहीं, AIADMK के दिग्गज नेता एम थंबीदुरई ने कहा है कि जनता चाहती है कि उनकी पार्टी सत्ता में लौटे, और ‘भगवान की कृपा’ से ऐसा जल्द हो सकता है।

हालांकि, DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने AIADMK के साथ किसी भी गठबंधन को फिलहाल नामुमकिन बताया है।

तमिलनाडु में इस समय ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति है।

एक तरफ विजय के समर्थक मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं कि उनका नेता मुख्यमंत्री बने, तो दूसरी तरफ अनुभवी राजनीतिक दल अपनी बिसात बिछा रहे हैं।

क्या थलापति विजय 6 विधायकों का जुगाड़ कर पाएंगे?

या फिर द्रविड़ राजनीति का यह नया अध्याय एक और चुनाव की ओर ले जाएगा?

इसका फैसला आने वाले कुछ घंटों में हो सकता है।

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