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MP में विधायक का ‘खुला ऑफर’: निर्मला सप्रे बोलीं- उमंग सिंघार 300 करोड़ दें तो वापस कांग्रेस में चली जाऊंगी!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP MLA Nirmala Sapre Demand: मध्य प्रदेश की राजनीति में आए दिन नए मोड़ देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे ने जो बयान दिया है, उसने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है।

सप्रे के इस बयान ने न केवल दल-बदल के मुद्दे को हवा दी है, बल्कि राज्य की सियासत में ‘विकास बनाम सौदेबाजी’ की बहस को भी तेज कर दिया है।

क्या कहा निर्मला सप्रे ने?

गुरुवार को सागर में कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचीं निर्मला सप्रे से जब पत्रकारों ने उनकी पार्टी की निष्ठा और सदस्यता को लेकर सवाल किए, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया।

सप्रे ने कहा, “जनता अपना फैसला सुना चुकी है। अब मामला कोर्ट में है और कोर्ट जो भी तय करेगा, मुझे वही मंजूर होगा। जहाँ तक पार्टी की बात है, मैं मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री का धन्यवाद करती हूँ कि उन्होंने बीना में 300 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए हैं।”

इसी दौरान उन्होंने विपक्ष के नेता उमंग सिंघार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर सिंघार बीना को जिला बनवा दें और 300 करोड़ रुपये के विकास कार्य दे दें, तो वे उनके (कांग्रेस के) साथ जाने को तैयार हैं।

उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में एक तरह की ‘सौदेबाजी’ और दूसरी तरफ ‘क्षेत्र के विकास की जिद’ के रूप में देखा जा रहा है।

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कांग्रेस की टिकट से भाजपा के मंच तक का सफर

निर्मला सप्रे की राजनीतिक यात्रा पिछले कुछ महीनों में काफी विवादास्पद रही है।

वे 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर बीना से विधायक चुनी गई थीं।

लेकिन चुनाव के कुछ समय बाद ही वे पाला बदलती नजर आईं।

वे सार्वजनिक तौर पर भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होने लगीं और मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ मंच साझा करने लगीं।

हालांकि, उन्होंने आधिकारिक तौर पर अब तक भाजपा की सदस्यता नहीं ली है, क्योंकि ऐसा करने पर उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है।

हाईकोर्ट में फंसा है मामला

सप्रे के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल रखा है।

दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) के उल्लंघन के आरोप में उनके खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

कांग्रेस का आरोप है कि सप्रे ने जनता के साथ विश्वासघात किया है और वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं।

कोर्ट में मामला होने की वजह से ही सप्रे अभी तक तकनीकी रूप से कांग्रेस विधायक बनी हुई हैं, लेकिन उनका दिल और काम भाजपा के साथ दिख रहा है।

बीना को जिला बनाने का मुद्दा

निर्मला सप्रे ने अपने बयान में बीना को जिला बनाने की मांग को सबसे ऊपर रखा।

बीना को जिला बनाने की मांग सालों पुरानी है और यह स्थानीय लोगों के लिए एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है।

सप्रे का कहना है कि वे बीना के विकास के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि जो पार्टी बीना को जिला बनाने का सपना पूरा करेगी, उनका समर्थन उसी को रहेगा।

कांग्रेस का पलटवार

सप्रे के इस बयान के बाद कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है।

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि सप्रे का बयान यह साबित करता है कि भाजपा लोकतंत्र में विधायकों की खरीद-फरोख्त कर रही है।

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या बताया।

वहीं भाजपा ने फिलहाल इस निजी बयान पर चुप्पी साधी हुई है।

निर्मला सप्रे का यह बयान आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है।

एक तरफ जहां कोर्ट में उन पर अयोग्यता की तलवार लटकी है, वहीं दूसरी तरफ 300 करोड़ वाली टिप्पणी ने उन्हें विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है।

अब देखना यह होगा कि बीना को जिला बनाने की यह राजनीति उन्हें किस किनारे पर लेकर जाती है।

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