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डेंगू पर करारा वार: भारत में ‘QDENGA’ वैक्सीन को DCGI की हरी झंडी, जानिए क्या होगी ऐज लिमिट और डोज का तरीका

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Qdenga Dengue Vaccine India: भारत में हर साल मानसून के बाद डेंगू का कहर देखने को मिलता है।

इस बीमारी से हर उम्र के लोग परेशान होते हैं, लेकिन अब डेंगू के खिलाफ जंग में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है।

देश में डेंगू की पहली वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ (QDENGA) को मंजूरी मिल गई है।

भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) ने जापानी फार्मा कंपनी ‘टाकेडा’ (Takeda) की इस वैक्सीन को भारतीय बाजार में इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है।

किसे और कैसे लगेगी यह वैक्सीन?

इस वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि इसे लगवाने के लिए किसी भी तरह की पूर्व जांच (Pre-vaccination screening) की जरूरत नहीं होगी

यानी आपको यह टेस्ट कराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है कि आपको पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं।

* उम्र की सीमा: 4 साल से लेकर 60 साल तक का कोई भी व्यक्ति यह वैक्सीन लगवा सकता है।

 * खुराक (Dose): इस वैक्सीन की कुल दो खुराक (Doses) दी जाएंगी।

 * अंतर: पहली डोज लगने के ठीक 3 महीने बाद दूसरी डोज दी जाएगी।

 * लगवाने का तरीका: हर डोज 0.5 मिलीलीटर की होगी, जिसे त्वचा के नीचे (Subcutaneous) इंजेक्शन के जरिए लगाया जाएगा।

मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में ही बनेगी वैक्सीन

क्यूडेंगा भले ही जापानी कंपनी टाकेडा की खोज है, लेकिन भारतीय मरीजों तक इसे आसानी से पहुँचाने के लिए इसका निर्माण भारत में ही किया जाएगा।

टाकेडा ने इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए हैदराबाद की प्रसिद्ध कंपनी ‘बायोलॉजिकल ई’ (Biological E) के साथ हाथ मिलाया है।

‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में बनने के कारण इसकी सप्लाई में कोई कमी नहीं आएगी और यह लोगों को किफायती दाम पर उपलब्ध हो सकेगी।

बाजार में आने के बाद शुरुआती 6 महीनों तक इसके असर और सुरक्षा पर पैनी नजर रखी जाएगी।

कितना असरदार है यह टीका?

इस वैक्सीन को मंजूरी देने से पहले इसके व्यापक ट्रायल किए गए हैं।

वैश्विक स्तर पर फेज-1, फेज-2 और फेज-3 के कुल 19 क्लिनिकल ट्रायल हुए, जिनमें 28,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया।

भारत में डेंगू वायरस के चारों रूप (Serotypes) एक साथ सक्रिय रहते हैं।

‘क्यूडेंगा’ को इस तरह तैयार किया गया है कि यह डेंगू के इन चारों सीरोटाइप्स के खिलाफ शरीर को सुरक्षा प्रदान करती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस वैक्सीन को हरी झंडी दिखाई है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर पूरी तरह सुरक्षित माना है।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह टीका?

दुनियाभर में डेंगू के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत में देखने को मिलता है।

तेजी से बदलते मौसम, शहरीकरण और मच्छरों के पनपने की वजह से डेंगू का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

ऐसे में यह वैक्सीन डेंगू से होने वाली मौतों और अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या को कम करने में मददगार साबित होगी।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण और साफ-सफाई जैसे उपाय भी उतने ही जरूरी रहेंगे।

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