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MP में UCC बिल पास: भारी हंगामे और वॉकआउट के बीच विधानसभा से मिली मंजूरी, सेलेक्ट कमेटी की मांग खारिज

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP UCC Bill Passed: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन भारी हंगामे, नारेबाजी और विपक्ष के विरोध के बीच समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) विधेयक को पास कर दिया गया।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार ने इस बिल को पटल पर रखा, जिसके तुरंत बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी झड़प देखने को मिली।

कांग्रेस नेताओं ने बिल को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजने की मांग की, जिसे सरकार ने साफ खारिज कर दिया।

भारी हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को सदन की कार्यवाही दो बार (पहले 10 मिनट और फिर 15 मिनट) स्थगित करनी पड़ी।

सांकेतिक नाटक और विपक्ष का तीखा हमला

सदन के भीतर कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले ही माहौल गरमा गया था।

कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में एक सांकेतिक नाटक का मंचन कर विरोध जताया।

* जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राज्य के वास्तविक मुद्दों जैसे—बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, स्वास्थ्य, शिक्षा, महंगाई और भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह बिल लाई है।

* संवैधानिक अधिकारों पर सवाल: कांग्रेस विधायक बाला बच्चन, आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने इसे सत्ता पक्ष का राजनीतिक एजेंडा बताया।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।

सदन में नारेबाजी और वॉकआउट का माहौल

विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा और विधायक विधानसभा के वेल (बीचो-बीच) में आकर सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस विधायक “चंदा चोरों, गद्दी छोड़ो” जैसे नारे लगा रहे थे।

दूसरी ओर, भाजपा विधायक और मंत्री विधेयक पर तुरंत चर्चा कर इसे पास कराने पर जोर दे रहे थे।

हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की व्यवस्था बनाने के लिए कार्यवाही को दो बार स्थगित किया।

जब संशोधन प्रस्तावों पर बहस के दौरान भी हंगामा नहीं थमा, तो विधायक आरिफ मसूद का संशोधन प्रस्ताव खारिज कर दिया गया और बहुमत के बल पर यूसीसी बिल पास घोषित कर दिया गया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बयान: 93% जनता का समर्थन

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन को संबोधित किया। सीएम ने अपने भाषण में प्रमुख बातें रखीं:

* जनता का समर्थन: मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत नागरिकों ने यूसीसी का समर्थन किया है।

* महिला सशक्तीकरण और समानता: उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं के अधिकारों, सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा देने वाला है।

* विवाह का शासकीय पंजीयन अनिवार्य: यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में होने वाले सभी विवाहों का सरकारी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन न कराने पर जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

* दूसरी शादी पर रोक: सीएम ने स्पष्ट किया कि यूसीसी लागू होने के बाद एक पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह और पति के रहते हुए पत्नी द्वारा दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी।

* कांग्रेस पर हमला: सीएम ने चौपाई “जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी” का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा मुस्लिम तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करती आई है।

1947 के इतिहास का जिक्र: मुख्यमंत्री ने संबोधन के दौरान यह भी कहा कि 1947 में जब देश आजाद हुआ, तब भोपाल को भारत में मिलाने की जगह अलग रखने या पाकिस्तान से मिलाने के प्रयास किए गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की सोच पर अफसोस होना चाहिए।

यूसीसी के बाद अब राजमार्ग संशोधन विधेयक पर चर्चा

यूसीसी बिल पास घोषित होने के बाद और 15 मिनट के स्थगन के बाद जब विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो सदन का ध्यान अन्य विधायी कार्यों की ओर गया।

इसके बाद मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक (MP Highway Amendment Bill) पर चर्चा शुरू की गई।

मुख्य बिंदु एक नजर में

विषय | स्थिति / विवरण 

  • विधेयक का नाम | समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 
  • विपक्ष की मांग | बिल को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजा जाए (खारिज) 
  • सदन स्थगन | 2 बार (10 मिनट और 15 मिनट) 
  • मुख्य प्रावधान | विवाह पंजीकरण अनिवार्य, एक जीवित साथी के रहते दूसरा विवाह प्रतिबंधित 
  • अगला विषय | मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 

उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश चौथा राज्य

मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में रेखांकित किया कि उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब मध्य प्रदेश भी उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।

उन्होंने कहा कि यह कानून किसी के धार्मिक संस्कारों को नुकसान नहीं पहुँचाएगा, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी तौर पर सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

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