Diwali Puja Muhurat 2026: दीपावली सिर्फ दीपों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में नई उम्मीदों, सुख, समृद्धि और सकारात्मकता के आगमन का जश्न है।
इस साल की दीपावली ज्योतिषीय और धार्मिक नजरिए से बहुत ही खास होने वाली है।
क्या आप जानते हैं कि इस बार ग्रहों की चाल कुछ ऐसा ताना-बाना बुन रही है, जो पिछले 120 सालों में नहीं देखा गया?
इस बार दीपावली रविवार के दिन पड़ रही है और इस दिन आसमान में कई शुभ योग बन रहे हैं।

तो आइए, आम बोलचाल की भाषा में और बहुत ही आसान तरीके से समझते हैं कि इस बार की दीवाली आपके, आपके परिवार और आपके व्यापार के लिए क्या नए संकेत लेकर आ रही है।
इस बार हाथी (गज) पर सवार होकर आ रही हैं मां लक्ष्मी
हम सब जानते हैं कि माता लक्ष्मी का पारंपरिक वाहन उल्लू है।
उल्लू हमें यह सिखाता है कि जब इंसान के पास बहुत सारा पैसा आ जाए, तो उसे अंधेरे यानी अज्ञानता में भी सही और गलत को देखने की अपनी क्षमता नहीं खोनी चाहिए।
लेकिन, ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो इस बार दीवाली रविवार को होने के कारण मां महालक्ष्मी गज यानी हाथी पर सवार होकर आ रही हैं।

हाथी को हिंदू धर्म में शक्ति, वैभव, ऐश्वर्य और अपार समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
जब मां लक्ष्मी हाथी पर सवार होकर आती हैं (जिसे गजलक्ष्मी स्वरूप भी कहा जाता है), तो यह देश के किसानों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है।
इसका सीधा मतलब है कि यह साल बाजार में रौनक लाएगा और फसलें भी अच्छी होंगी।
बुधादित्य और आयुष्मान योग: क्या है इसका मतलब?
इस साल दीवाली पर आसमान में ‘बुधादित्य योग’ बन रहा है।
ज्योतिष की भाषा में जब सूर्य और बुध ग्रह एक ही राशि में एक साथ आ जाते हैं, तो इस शुभ युति को बुधादित्य योग कहते हैं।
इस बार सूर्य, चंद्रमा और बुध तीनों तुला राशि में एक साथ गोचर कर रहे हैं।
* बुध ग्रह को हमारी बुद्धि, हमारी बातचीत करने की कला (वाणी) और व्यापार का देवता माना जाता है।
* सूर्य ग्रह हमारे आत्मविश्वास, समाज में हमारे मान-सम्मान और लीडरशिप का प्रतीक है।

जब ये दोनों मिलते हैं, तो इंसान की निर्णय लेने की क्षमता बहुत मजबूत हो जाती है। व्यापार में मुनाफा होता है और समाज में रुतबा बढ़ता है।
इसके साथ ही इस दिन ‘आयुष्मान योग’ भी है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। चंद्रमा हमारे मन को कंट्रोल करते हैं।
इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, महाकाली और भगवान गणेश की सच्चे मन से पूजा करने पर मानसिक शांति और अपार सफलता मिलती है।
120 सालों के बाद बन रहा है ग्रहों का ये दुर्लभ संयोग
आसमान में ग्रहों की चाल इस समय बहुत ही दिलचस्प है।
फिलहाल देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) का ‘अतिचार’ गति क्रम चल रहा है।
वहीं न्याय के देवता शनि देव उल्टी चाल (वक्री) चलते हुए मीन राशि में बैठे हैं।
बृहस्पति और शनि का यह खास कनेक्शन एक ऐसी दुर्लभ स्थिति बना रहा है, जो करीब 120 साल में एक बार ही देखने को मिलती है।

इस बड़े बदलाव का असर हमारी अर्थव्यवस्था पर सीधा पड़ेगा। आने वाले तीन महीनों में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
खास तौर पर अगर आप शेयर बाजार, बैंकिंग सेक्टर या सोने (Gold) के कारोबार से जुड़े हैं, तो आपको कुछ अप्रत्याशित और चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि, शुक्र ग्रह भी कन्या राशि में वक्री हैं, जो नीच के माने जाते हैं, लेकिन दीवाली के दिन वृषभ लग्न में उनका केंद्र-त्रिकोण योग बन रहा है।
इसका मतलब है कि मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने पर सभी नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाएंगे।
तिथियों का खेल: एक ही दिन में दो-दो त्योहार
कई बार पंचांग की गणना और समय के अंतर के कारण त्योहारों की तारीखें आगे-पीछे हो जाती हैं।
जैसे इस बार धनतेरस 6 नवंबर को मनाई गई, क्योंकि धन त्रयोदशी की पूजा शाम के समय (प्रदोष काल) में होती है।
त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर की सुबह 10:50 बजे तक ही रहेगी, जिसके तुरंत बाद चतुर्दशी शुरू हो जाएगी।
वहीं, नरक चतुर्दशी (जिसे हम छोटी दीवाली भी कहते हैं) सुबह का त्योहार है।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में पितरों के लिए दीप जलाए जाते हैं (दीप श्राद्ध)।
चतुर्दशी तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:30 बजे तक रहेगी और फिर अमावस्या लग जाएगी।
इसलिए 8 नवंबर को पूरे दिन और रात अमावस्या रहेगी, जो दीपावली मुख्य पूजा के लिए सबसे अहम दिन होता है।
लक्ष्मी पूजन का सबसे सटीक समय (मुहूर्त)
दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा का सबसे ज्यादा फल शाम के समय, यानी ‘प्रदोष काल’ में मिलता है।
मान्यता है कि इसी समय समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
अगर आप दिन में भी पूजा करना चाहते हैं, तो चौघड़िया के अनुसार समय देख सकते हैं। यहां पूजा के शुभ मुहूर्त की पूरी लिस्ट दी गई है:
* प्रदोष काल (सबसे शुभ): शाम 5:41 बजे से रात 8:17 बजे तक।
* वृषभ लग्न (स्थिर लक्ष्मी के लिए): शाम 6:09 बजे से रात 8:07 बजे तक।
* सिंह लग्न (रात की तांत्रिक/विशेष पूजा): रात 12:37 से 2:49 बजे तक।
दिन के समय चौघड़िया के अनुसार मुहूर्त:
* सुबह 8:10 से 9:40 बजे तक – चंचल
* सुबह 9:40 से 11:10 बजे तक – लाभ
* सुबह 11:28 से दोपहर 12:12 बजे तक – अमृत
* सुबह 11:46 से दोपहर 12:34 बजे तक – अभिजीत मुहूर्त
* दोपहर 1:35 से 2:58 बजे तक – शुभ
* शाम 5:49 से रात 8:59 बजे तक – शुभ-अमृत
आपकी राशि और दीपावली के विशेष अचूक उपाय
दीवाली की रात किए गए उपाय बहुत ही जल्दी असर दिखाते हैं। आप अपनी राशि के अनुसार ये छोटे लेकिन बेहद असरदार पाठ कर सकते हैं:
राशि (Zodiac) | दीवाली की रात क्या करें (उपाय) |
- मेष : कर्ज से मुक्ति के लिए ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ के साथ लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ जरूर करें।
- वृषभ : धन लाभ के लिए ‘कनकधारा स्तोत्र’ पढ़ें और साथ में भगवान दत्तात्रेय का ध्यान करें।
- मिथुन : बुद्धि और धन के लिए गणेश पंचरत्न स्तोत्र, दुर्गा स्तोत्र और महालक्ष्मी अष्टक पढ़ें।
- कर्क |:जीवन के कष्ट दूर करने के लिए ‘गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र’ के साथ लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
- सिंह : मान-सम्मान के लिए सूर्य-मंगल अष्टक और लक्ष्मीनृसिंह स्तोत्र का पाठ फायदेमंद रहेगा।
- कन्या : श्री गणेश अष्टक का पाठ करें और मां लक्ष्मी के बीज मंत्रों का लगातार जाप करें। |
- तुला : सुख-समृद्धि के लिए ‘श्रीसूक्त’ का पाठ करें और त्र्यक्षरी बीज मंत्र जपें।
- वृश्चिक : मंगल चंडिका स्तोत्र के साथ मंगला लक्ष्मी का पाठ करने से विशेष कृपा मिलेगी। |
- धनु : श्री गणेश, लक्ष्मी और सरस्वती जी की पूजा करें और ‘अष्टोत्तर विष्णु शतनामावली’ पढ़ें।
- मकर : शनि देव को शांत रखने और धन के लिए शनि स्तोत्र के साथ ‘लक्ष्मी कवच’ का पाठ करें।
- कुंभ : मयुरेश स्तोत्र के साथ मां लक्ष्मी की स्तुति और सरस्वती वंदना करें।
- मीन: सरस्वती अष्टक, लक्ष्मी अष्टक और गणेश अष्टक का आरोह-अवरोह (सीधे और उल्टे) क्रम में पाठ करें।
इस दीवाली, ग्रहों की यह विशेष स्थिति हम सभी के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आई है।
सही समय पर, सच्चे मन से की गई पूजा और अपनी राशि के अनुसार किए गए छोटे से उपाय आपके जीवन को खुशियों और धन-धान्य से भर सकते हैं। शुभ दीपावली!
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