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रसोई गैस पर महंगाई की मार होगी कम: भोपाल की पंचायतों में बिछी PNG लाइन, ₹200 तक की होगी बचत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhopal Village PNG Pipeline: राजधानी भोपाल के शहरी इलाकों के बाद अब PNG जल्द ही गांवों की रसोई की रौनक बढ़ाने वाली है।

भोपाल जिला प्रशासन और ‘थिंक गैस’ कंपनी ने मिलकर एक बड़ा प्लान तैयार किया है, जिसके तहत शहर से सटी ग्राम पंचायतों में पीएनजी की पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।

इसकी सफल शुरुआत समरधा और बगरोदा जैसे गांवों से हो चुकी है।

लक्ष्य यह है कि इस साल (2026) के आखिर तक भोपाल जिले की सभी प्रमुख सीमावर्ती पंचायतों में गैस की सप्लाई शुरू कर दी जाए।

सिलेंडर की ‘वेटिंग’ और ‘किल्लत’ का होगा अंत

अक्सर देखा जाता है कि त्योहारों या किसी खास मौके पर एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बुकिंग के बाद भी डिलीवरी में हफ्तों लग जाते हैं।

पिछले कुछ समय में भोपाल की गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें भी देखने को मिली थीं।

इन्ही परेशानियों को देखते हुए केंद्र सरकार और राज्य के खाद्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पीएनजी के जाल को फैलाया जाए।

इससे न केवल सिलेंडर खत्म होने का डर खत्म होगा, बल्कि बार-बार बुकिंग करने के झंझट से भी आजादी मिलेगी।

जेब पर कम पड़ेगा बोझ: ₹200 तक की सीधी बचत

महंगाई के इस दौर में पीएनजी आम आदमी के बजट के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। आंकड़ों की मानें तो:

  • एक एलपीजी सिलेंडर की कीमत वर्तमान में लगभग ₹950 के आसपास है।
  • वहीं, पीएनजी की दर ₹44 प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) है।
  • एक औसत परिवार में जितनी गैस एक सिलेंडर (14.2 किलो) से मिलती है, उतनी ही ऊर्जा के लिए लगभग 15-16 SCM पीएनजी की जरूरत होती है।
  • गणित साफ है—पीएनजी के इस्तेमाल से हर महीने एक परिवार को 150 से 200 रुपये की सीधी बचत होगी। साथ ही, इसमें कोई छुपा हुआ डिलीवरी चार्ज भी नहीं देना पड़ता।

कहां-कहां बिछ रहा है पाइपलाइनों का जाल?

भोपाल के करीब 400 कॉलोनियों में नेटवर्क पहले ही पहुंच चुका है।

अब बारी उन इलाकों की है जो शहर और गांव की दहलीज पर हैं। इनमें शामिल हैं:

प्रमुख क्षेत्र: लांबाखेड़ा, आनंद नगर, अयोध्या नगर, नवीबाग, गांधीनगर, रातीबड़, नीलबड़, कटारा हिल्स, अवधपुरी, और बर्रई जैसे इलाके।

इन क्षेत्रों को मुख्य हब बनाया गया है, जहां से पाइपलाइन सीधे पास के गांवों जैसे बंगरसिया और बिलखिरिया तक ले जाई जा रही है।

जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, सिलेंडर की मांग प्रतिदिन 11 हजार के पार जा रही है, जिसे संभालना चुनौतीपूर्ण है।

ऐसे में पीएनजी ही भविष्य का सबसे बेहतर और सुलभ विकल्प है।

सुरक्षित और निरंतर सप्लाई

पीएनजी की सबसे बड़ी खासियत इसकी निरंतरता है। यह बिजली की तरह 24 घंटे उपलब्ध रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत की 50% गैस खुद बनाता है और बाकी कतर जैसे देशों से आयात करता है।

गेल (GAIL) और ओएनजीसी जैसी बड़ी कंपनियां इसकी बैकएंड सप्लाई सुनिश्चित करती हैं।

चूंकि यह हवा से हल्की होती है, इसलिए किसी भी रिसाव की स्थिति में यह जल्दी फैल जाती है और एलपीजी के मुकाबले कम जोखिम भरी होती है।

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