CJI on Rahul Gandhi March: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर और बाहर हुए घटनाक्रमों को लेकर एक अहम सुनवाई हुई।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि कोई भी संस्था या व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के प्रयास पूरी तरह से बेकार हैं और अदालत इन बातों पर बिल्कुल ध्यान नहीं देती।
CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हम जानते हैं कि लोग कोर्ट के बाहर क्या कह रहे हैं और अंदर क्या हो रहा है। हम किसी दूसरी दुनिया में नहीं रहते हैं।”

किस मामले पर हो रही थी सुनवाई?
दरअसल, यह पूरा मामला हाल ही में विपक्षी नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च और ‘स्पेशल इंसेंटिव/इंटेलिजेंस रोल’ (SIR) से जुड़े विवाद का है।
इस दौरान राहुल गांधी समेत 14 अन्य नेताओं की याचिका पर भी बात हुई।
कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिना किसी का नाम लिए एक याचिकाकर्ता के रवैये पर भी सवाल उठाए।
अदालत ने कहा कि वह संबंधित व्यक्ति से उनके व्यवहार के बारे में स्पष्टीकरण और सफाई मांगना चाहती है।

CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट के सामने एक गंभीर मुद्दा उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब राहुल गांधी और अन्य नेता सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचे थे, तब वहां एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की हुई थी।
गौरव भाटिया ने मांग की कि उस दिन के सभी CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए।
इस पर पीठ में शामिल जस्टिस बागची ने संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित कानूनी और सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए कि वे घटना के समय के सभी डिजिटल और CCTV फुटेज को सुरक्षित रखें।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस घटना से जुड़ा कोई भी सबूत कोई भी व्यक्ति आकर कोर्ट में जमा करा सकता है।

विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने वालों की तय होगी जवाबदेही
सुनवाई के दौरान एक और अहम याचिका पर CJI ने नोटिस जारी किया।
इस याचिका में मांग की गई है कि जो भी नेता या संगठन किसी बड़े विरोध प्रदर्शन या मार्च का बुलावा देता है, प्रदर्शन के दौरान होने वाली अव्यवस्था या आम लोगों को होने वाले नुकसान की सीधी जिम्मेदारी भी उसी आयोजक की होनी चाहिए।
क्यों शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई थी, जब विपक्षी सांसदों ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर मुलाकात करने और ज्ञापन सौंपने का समय मांगा था।
हालांकि, CJI ने औपचारिक मुलाकात से मना कर दिया था।

इसके बाद, 12 अक्टूबर की शाम को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई विपक्षी नेता दिल्ली के बाराखंभा रोड से मार्च निकालते हुए अचानक सुप्रीम कोर्ट के अंदर दाखिल हो गए थे।
चुनाव आयोग (ECI) पर विपक्ष के 4 बड़े सवाल
विपक्ष द्वारा SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके मुख्य चार कारण सामने आए हैं:
* SIR पर बार-बार आपत्ति: विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग के भीतर ही इस प्रक्रिया को लेकर मतभेद हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार अपनी असहमति या आपत्ति दर्ज कराई है।
* वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की आशंका: वोटर लिस्ट में नए नाम जोड़ने, पुराने नाम हटाने और दोबारा नाम शामिल करने की प्रक्रिया पर भी चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए हैं। इसके अलावा चुनावी डेटा से जुड़ी सुरक्षा पर भी चिंता जताई गई है।
* फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव: चुनाव प्रक्रिया के तहत भरे जाने वाले ‘फॉर्म-6’ में SIR से जुड़े नए सवाल शामिल करने के फैसले पर भी अंदरूनी विरोध की बातें सामने आई हैं।
* डेटा शेयरिंग और कार्य विभाजन: चुनावी सॉफ्टवेयर और डेटा तक पहुंच को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे जाने की बात सामने आई है। साथ ही काम के बंटवारे के नए नियमों को भी तय मानकों के खिलाफ बताया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र और चुनाव आयोग को जारी किए गए नोटिस के बाद अब सभी पक्षों के जवाब का इंतजार है।
अदालत की इस सख्त टिप्पणी से यह साफ हो गया है कि न्यायपालिका किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव को स्वीकार नहीं करेगी।
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