Justice Yashwant Varma: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने 10 अप्रैल, शुक्रवार को अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है।
यह इस्तीफा महज एक सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, करोड़ों का कैश और संसद की महाभियोग प्रक्रिया की एक लंबी कहानी जुड़ी हुई है।
जस्टिस वर्मा पिछले काफी समय से विवादों के केंद्र में थे और उन पर लगे आरोपों ने पूरी न्यायपालिका को झकझोर कर रख दिया था।
Justice Yashwant Varma of the Allahabad High Court has submitted his resignation to the President. He was earlier transferred from the Delhi High Court back to Allahabad following a controversy over alleged cash discovery at his residence. He took oath on April 5, 2025, and is… pic.twitter.com/KZJNpcLP2a
— ANI (@ANI) April 10, 2026
क्या है ‘कैश कांड’?
मामला 14 मार्च 2025 का है, जब दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर अचानक आग लग गई थी।
जब दमकल विभाग और सुरक्षा एजेंसियां वहां पहुंचीं, तो उन्हें जो कुछ मिला उसने सबके होश उड़ा दिए।
जांच के दौरान घर के अंदर से 500-500 रुपये के नोटों के भारी भरकम बंडल बरामद हुए, जो आग में झुलस चुके थे।
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद यह मामला ‘कैश कांड’ के रूप में मशहूर हो गया।
सवाल उठने लगे कि एक न्यायाधीश के घर पर इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई?
इसके बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और मामला सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक पहुंच गया।

तबादला और न्यायिक कार्यों पर रोक
विवाद बढ़ता देख जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से हटाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था।
उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ तो ली, लेकिन उन्हें कोई भी न्यायिक काम नहीं सौंपा गया।
न्यायपालिका की गरिमा को ध्यान में रखते हुए उन्हें बेंच से दूर रखा गया था।
प्रशासन का साफ निर्देश था कि जब तक उनके खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार की जांच पूरी नहीं हो जाती, वे अदालती कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनेंगे।
🚨 BREAKING: Allahabad HC Judge Justice Yashwant Varma resigns, submits resignation to the President
The judge was under scrutiny after burnt currency notes were allegedly found at his official residence in Delhi.
An impeachment process was also underway. In his letter, he… pic.twitter.com/Xzc5ccmU5w
— The News Drill™ (@thenewsdrill) April 10, 2026
संसद में महाभियोग की तलवार
भ्रष्टाचार के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) चलाने की तैयारी शुरू हुई।
तीन हाईकोर्ट जजों की एक आंतरिक समिति ने अपनी जांच में जस्टिस वर्मा को दोषी पाया था और उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की थी। इसके बाद मामला संसद पहुंचा।
नियमों के मुताबिक, लोकसभा में 146 सांसदों के समर्थन के साथ एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला ने मंजूरी दे दी। हालांकि, इस प्रक्रिया में एक तकनीकी पेंच फंस गया।
राज्यसभा में इसी तरह का प्रस्ताव खारिज हो गया था, लेकिन लोकसभा स्पीकर ने अकेले ही जांच समिति का गठन कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई
जस्टिस वर्मा ने खुद को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लोकसभा की जांच समिति को चुनौती दी।
उनके वकील का तर्क था कि ‘जज जांच कानून 1968’ के तहत किसी जज को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों की संयुक्त सहमति से समिति बननी चाहिए, न कि अकेले लोकसभा अध्यक्ष द्वारा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी कीं।
कोर्ट ने माना कि प्रक्रिया में कुछ खामियां जरूर दिख रही हैं।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने पूछा कि जब राज्यसभा में प्रस्ताव गिर गया था, तो लोकसभा ने अकेले समिति कैसे बना दी?
कोर्ट ने संसद के कानूनी विशेषज्ञों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, कोर्ट ने जस्टिस वर्मा को पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय देने से मना कर दिया और फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कौन है जस्टिस यशवंत वर्मा
- जन्म: 6 जनवरी 1969
- स्थान: इलाहाबाद, यूपी
- शिक्षा: ग्रेजुएट (हंसराज कॉलेज), बी. कॉम ऑनर्स (दिल्ली विवि), LLB (रीवा विवि)
करियर
- 8 अगस्त 1992 को वकालत शुरू की।
- 2006 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्पेशल एडवोकेट।
- 2012-2013 तक उत्तर प्रदेश के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल ।
- अगस्त 2013 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीनियर वकील ।
- 13 अक्टूबर 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने।
- 1 फरवरी 2016 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में परमानेंट जज बने।
- 11 अक्टूबर 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट में जज बने।

इस्तीफा: दबाव या स्वेच्छा?
लगातार बढ़ते दबाव, न्यायिक कार्यों से दूरी और संसद की कड़ी कार्यवाही के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा ने आखिरकार पद छोड़ना ही बेहतर समझा।
जानकारों का मानना है कि महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए हटाए जाने की बदनामी से बचने के लिए उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया।
अब जब इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा जा चुका है, तो उनकी आधिकारिक सेवाएं समाप्त हो जाएंगी, लेकिन उनके खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार की जांच पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है।
STORY | Allahabad HC judge Justice Yashwant Varma, facing impeachment proceedings, resigns
Allahabad High Court judge Justice Yashwant Varma, facing impeachment proceedings after wads of burnt currency notes were found at his residence in New Delhi, has submitted his resignation… pic.twitter.com/nCMm1aMzNL
— Press Trust of India (@PTI_News) April 10, 2026
जस्टिस यशवंत वर्मा का यह मामला भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक काले धब्बे की तरह देखा जा रहा है।
यह मामला याद दिलाता है कि कानून की कुर्सी पर बैठने वाले लोग भी कानून के दायरे से बाहर नहीं हैं।
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