इंदौर शहर से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है।
आरोप है कि शहर के अलग-अलग इलाकों में लगभग 32 ऐसे डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं, जिनके पास पाकिस्तान की संदिग्ध डिग्रियां हैं और उन्हें भारत में इलाज करने की वैध अनुमति (मान्यता) नहीं है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता चर्चिल शास्त्री ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर सभी 32 डॉक्टरों की नामजद सूची सौंपी है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता अधिवक्ता चर्चिल शास्त्री का दावा है कि ये सभी डॉक्टर फर्जी पाकिस्तानी डिग्रियों के आधार पर इंदौर के विभिन्न क्लीनिकों और अस्पतालों में लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
शिकायत में एक पुरानी घटना का हवाला देते हुए बताया गया कि पूर्व में डॉ. ज्ञानचंद पंजवानी और डॉ. बागेचा नामक डॉक्टरों द्वारा एक महिला के गलत इलाज के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी।
उस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी और जांच में उनकी डिग्रियां फर्जी पाई गई थीं।
वकील का आरोप है कि वर्तमान में सक्रिय ये 32 डॉक्टर भी उसी श्रेणी में आते हैं।
स्वास्थ्य विभाग पर जानकारी छिपाने का आरोप
हैरानी की बात यह है कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने 3 फरवरी 2026 को मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) माधव हासानी को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन देकर इन डॉक्टरों की डिग्री और दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी।
लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
इसके बाद 9 मार्च 2026 को क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक के पास अपील की गई।
संचालक ने सीएमएचओ को 7 दिनों के भीतर जानकारी देने के सख्त निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
इसी ‘गोपनीयता’ के चलते शक और गहरा गया है कि क्या विभाग इन डॉक्टरों को संरक्षण दे रहा है?

इन डॉक्टरों के खिलाफ हुई है शिकायत
कलेक्टर को सौंपी गई सूची में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
डॉ. जगदीश श्यामनानी, डॉ. सरला बजाज, डॉ. चांदीराम सातवानी, डॉ. राजकुमार बदलानी, डॉ. रामचंद्र बजाज, डॉ. परसराम खेतपाल, डॉ. जयचंद मुंजार, डॉ. मेघराज बजाज, डॉ. शत्रुघ्न पंजवानी, डॉ. प्रकाश सातवानी, डॉ. हीरानंद वाधवानी, डॉ. मोहनलाल मोटवानी, डॉ. एस. सी. हबलानी, डॉ. रतन के सोनिटा, डॉ. सुभाष चावला, डॉ. रमेशलाल बदलानी, डॉ. एस. के. चुग, डॉ. रमेशलाल सातवानी, डॉ. जयकुमार परयानी, डॉ. मनोहरलाल गेही, डॉ. राजेश वाधवानी, डॉ. अर्जुनदास बदलानी, डॉ. दानेश गोविंदवानी, डॉ. मनोहर सातवानी, डॉ. मनोहर हबलानी, डॉ. ज्ञानचंद पंजाबी, डॉ. रामचंद्र थोरानी, डॉ. शशपाल सचदेव, डॉ. विजय कुमार परयानी, डॉ. दीवान गेही और डॉ. रविंद्र औच्छानि।
प्रशासन का रुख
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश देने की बात कही है।
नियमों के मुताबिक, विदेशी मेडिकल डिग्री रखने वाले किसी भी व्यक्ति को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन’ (FMGE) पास करना और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है।
यदि जांच में इन डॉक्टरों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो इन पर धोखाधड़ी और अवैध प्रैक्टिस के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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