Mamata Banerjee Refuses to resign: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है।
15 साल से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है।
चुनाव परिणामों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की 294 सीटों में से 207 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई है।
लेकिन इस हार के बाद जो सियासी ड्रामा शुरू हुआ है, उसने बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है।

ममता बनर्जी का कड़ा रुख: “राजभवन नहीं जाऊंगी“
चुनाव नतीजों के अगले दिन मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बेहद आक्रामक नजर आईं।
आमतौर पर हार के बाद मुख्यमंत्री राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपते हैं, लेकिन ममता ने साफ कह दिया कि वह इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाएंगी।
उन्होंने तर्क दिया कि यह जनादेश स्वाभाविक नहीं है, बल्कि इसे ‘मैनेज’ किया गया है।
ममता ने दो टूक कहा, “हम चुनाव हारे नहीं हैं, बल्कि हमें योजनाबद्ध तरीके से हराया गया है।”

चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने अपनी हार का ठीकरा भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग (EC) के सिर फोड़ा।
उन्होंने चुनाव आयोग को इस पूरी प्रक्रिया का ‘विलेन’ करार देते हुए कहा कि यह बीजेपी और आयोग के बीच साठगांठ का नतीजा है।
ममता ने ‘SIR’ (Systematic Information Redaction) का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि साजिश के तहत 90 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे।
उन्होंने कहा, “जब हम कोर्ट गए, तब मुश्किल से 32 लाख नाम वापस जोड़े गए। बीजेपी ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर गेम खेला और हमारे करीब 100 सीटें लूट लीं।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे तौर पर इस प्रक्रिया में शामिल होने का आरोप लगाया।
काउंटिंग डे का ‘खौफनाक’ अनुभव
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी भावुक और गुस्से में नजर आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार को मतगणना (Counting) के दौरान उनके एजेंटों के साथ मारपीट की गई।
ममता ने कहा, “सीआरपीएफ के जवानों और बाहर से आए गुंडों ने हमारे लोगों को काउंटिंग रूम से बाहर निकाल दिया। जब मैं खुद वहां पहुंची, तो मेरी गाड़ी रोकी गई। उन्होंने मेरे पेट और पीठ पर लात मारी और मुझे धक्का देकर बाहर निकाल दिया।”

उन्होंने कोलकाता के राजारहाट न्यूटाउन सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अभी भी धांधली की वजह से रिजल्ट पेंडिंग है।
ममता के अनुसार, बंगाल के इतिहास में यह एक ‘काला अध्याय’ है।
“अब मैं आजाद चिड़िया हूं”: भविष्य की योजना
सत्ता जाने के बावजूद ममता बनर्जी ने हार नहीं मानी है। उन्होंने कहा कि पद जाने से वह अब और भी स्वतंत्र महसूस कर रही हैं।
ममता ने कहा, “पिछले 15 सालों में मैंने न तो वेतन लिया और न ही पेंशन। मैंने अपना जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया। अब मैं एक आजाद चिड़िया हूं और अपने तरीके से काम करूंगी।”

ममता ने स्पष्ट किया कि उनका अगला लक्ष्य ‘INDIA’ गठबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है।
उन्होंने बताया कि हार के बाद राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने उनसे बात की है और वह पूरी तरह से विपक्ष के साथ खड़ी हैं।
क्या बंगाल में संघर्ष जारी रहेगा?
ममता बनर्जी के इस रुख से साफ है कि बंगाल में बीजेपी के लिए सरकार चलाना इतना आसान नहीं होगा।
जहां एक तरफ बीजेपी अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रही है, वहीं ममता बनर्जी ने ‘सड़क पर उतरकर’ संघर्ष करने का संकेत दे दिया है।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “इतिहास खुद को दोहराएगा” और जब केंद्र में बीजेपी की सत्ता नहीं रहेगी, तब उन्हें भी ऐसे ही हालात का सामना करना पड़ेगा।
