MP electricity crisis: मध्य प्रदेश में इस समय बिजली कटौती का मुद्दा ग्रामीण इलाकों से लेकर सीधे राजधानी भोपाल के सत्ता के गलियारों तक गूंज रहा है।
राज्य के एक दर्जन से ज्यादा जिलों में बिजली की आंख-मिचोली से परेशान आम जनता, किसान और विपक्षी नेता सड़कों पर उतर आए हैं।
कहीं बिजली ग्रिडों का घेराव किया जा रहा है, तो कहीं चक्काजाम और प्रदर्शन हो रहे हैं।
हालात यह हैं कि अब सिर्फ जनता ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के विधायक और मंत्री भी अधिकारियों के रवैये से परेशान होकर मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री तक अपनी गुहार पहुंचा रहे हैं।

एक दर्जन से ज्यादा जिलों में उबाल
पिछले कुछ दिनों से मध्य प्रदेश के कई जिलों में बिजली संकट गहराया हुआ है।
जिन प्रमुख जिलों में विरोध प्रदर्शन और हंगामे की खबरें सामने आई हैं, उनमें मंदसौर, राजगढ़, सीहोर, बड़वानी, धार, झाबुआ, खंडवा, आगर मालवा, नर्मदापुरम और बुरहानपुर मुख्य रूप से शामिल हैं।
* मंदसौर में हंगामा: मंदसौर जिले के गरोठ, सुवासरा, बालागुड़ा और शामगढ़ में किसानों ने बिजली ग्रिडों को घेर लिया। गरोठ-भोपाल रोड पर करीब तीन घंटे तक लंबा चक्काजाम रहा।
स्थानीय विधायक विपिन जैन के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव किया, जहां अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोक भी देखने को मिली।

* राजगढ़ का तीखा सवाल: राजगढ़ में पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर ने ग्रामीणों के साथ मिलकर जोरदार प्रदर्शन किया।
उन्होंने नवरात्रि के पावन पर्व पर आरती के समय बिजली गुल होने पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि क्या गांवों में हिंदू नहीं रहते?
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति ठीक नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

* सीहोर से बुरहानपुर तक विरोध: सीहोर के बिलकिसगंज में ग्रामीणों ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध दर्ज कराया।
वहीं बड़वानी, धार, आगर मालवा, झाबुआ, खंडवा, पिपरिया (नर्मदापुरम) और बुरहानपुर में भी किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैलियां निकालीं, ज्ञापन सौंपे और कलेक्टर-अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया।
मंत्रियों और विधायकों का फूटा गुस्सा
यह समस्या अब केवल आम जनता तक सीमित नहीं रही है, बल्कि खुद सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री भी इसके शिकार हो रहे हैं।
कई बीजेपी विधायकों ने सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विभाग को पत्र लिखकर अपने क्षेत्रों में हो रही भारी कटौती को रोकने की मांग की है।

हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सहित कई मंत्रियों ने अपने-अपने इलाकों में बिजली संकट की बात रखी।
इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए अगली कैबिनेट बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा कर ठोस समाधान निकालने का भरोसा दिया है।

क्यों हो रही है बिजली की इतनी किल्लत?
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार, इस संकट की मुख्य वजह बिजली की मांग (Demand) में अचानक और भारी उछाल है।
* आंकड़े क्या कहते हैं: राज्य में 11 अक्टूबर को बिजली की कुल मांग बढ़कर लगभग 16,000 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी तारीख को मांग करीब 11,000 मेगावाट थी।
यानी महज एक साल के भीतर बिजली की खपत में 38 से 40 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
* रबी सीजन का दबाव: इस समय प्रदेश में रबी की बुवाई का सीजन नजदीक आ रहा है, जिसके चलते खेतों में सिंचाई के लिए बिजली की मांग और अधिक बढ़ जाती है।
ग्रामीण इलाकों में अभी भी कई जगहों पर 2 से लेकर 8 घंटे तक की अघोषित कटौती की शिकायतें मिल रही हैं, जिससे किसानों की फसलें सूखने का डर सता रहा है।

सरकार और ऊर्जा विभाग की क्या है तैयारी?
बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और किसानों के कड़े तेवर को देखते हुए सरकार एक्शन मोड में आ गई है।
भारतीय किसान संघ ने भी बिजली समस्या के समाधान के लिए दशहरे तक का अल्टीमेटम दे रखा है।
इस बीच ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने पावर मैनेजमेंट कंपनी, उत्पादन और ट्रांसमिशन से जुड़े सभी बड़े अधिकारियों के साथ हाईलेवल मीटिंग की है।

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रबी सीजन में किसानों को किसी भी हाल में 10 घंटे नियमित बिजली मिलना सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही, बिजली उत्पादन बढ़ाने, कोयले की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और स्थानीय स्तर पर आ रही तकनीकी बाधाओं को तुरंत दूर करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अब देखना यह होगा कि सरकार के इन कागजी और प्रशासनिक निर्देशों का जमीन पर कितना असर होता है और क्या किसानों व आम जनता को इस बिजली संकट से राहत मिल पाती है।
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